
Bittu Tabahi Ajnar River Rajgarh: राजगढ़ के ब्यावरा की अजनार नदी इन दिनों सिर्फ सफाई को लेकर चर्चा में नहीं है, बल्कि एक युवक के दावे और ग्राउंड रिपोर्ट के बीच अंतर को लेकर भी सुर्खियों में है. सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से मशहूर 21 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी ने नदी में उतरकर सफाई करने के वीडियो पोस्ट किए. देखते ही देखते ये वीडियो वायरल हो गए और उनके काम की तारीफ उद्योगपति आनंद महिंद्रा से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव और इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन तक ने की.
लेकिन अब अजनार नदी की सफाई को लेकर एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है. स्थानीय लोगों, अजनार बचाओ समिति और नगर पालिका के अधिकारियों के मुताबिक, नदी की सफाई पिछले कई वर्षों से सामूहिक प्रयासों से होती रही है. समिति का दावा है कि सुरेंद्र सिंह चौधरी भी उसके सदस्य हैं और सफाई अभियानों में सहयोग करते रहे हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर अकेले नदी को साफ करने के दावे को लेकर शहर में बहस छिड़ गई है.
हालांकि, इस विवाद के बीच एक बात पर कोई सवाल नहीं है कि बिट्टू ने नदी में उतरकर सफाई का काम शुरू किया और इस मुद्दे को सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाया.

26 जनवरी को नदी में उतरा 21 साल का युवक
ब्यावरा निवासी सुरेंद्र सिंह चौधरी B.Sc के छात्र हैं. सोशल मीडिया पर उन्हें 'बिट्टू तबाही' के नाम से जाना जाता है. 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के दिन उन्होंने अजनार नदी की हालत देखी और उसे साफ करने का फैसला किया. नदी में प्लास्टिक, बोतलें, जलकुंभी, गाद और दूसरी गंदगी जमा थी.
बिट्टू ने नदी में उतरकर कचरा निकालना शुरू किया. शुरुआत में कुछ दोस्त भी उनके साथ आए, लेकिन बाद में वह ज्यादातर समय अकेले ही सफाई करते रहे. उन्होंने सफाई के दौरान वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर नदी की पहले और बाद की तस्वीरें शेयर करनी शुरू कीं. यहीं से उनकी कहानी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचने लगी. देखें VIDEO:-
अपनी जेब से खर्च किए करीब 30 हजार रुपये
बिट्टू के मुताबिक, नदी की सफाई के अभियान में उन्होंने अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च किए. सफाई के लिए जरूरी सामान और डस्टबिन आदि खरीदने में उन्होंने पैसे लगाए. उन्होंने पूजा सामग्री से निकलने वाले कचरे को अलग करने और उसे कंपोस्ट में बदलने की कोशिश भी की.
यह काम आसान नहीं था. प्रदूषित पानी में उतरने के कारण उनके हाथों में संक्रमण तक हो गया, लेकिन उन्होंने सफाई जारी रखी. उनका कहना था कि गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी के दिन उन्हें लगा कि ऐसा काम किया जाए, जिससे समाज को फायदा हो. इसके बाद उन्होंने अजनार नदी को साफ करने का अभियान शुरू किया.
'व्यूज के लिए कर रहे हो सफाई' का भी सामना
बिट्टू को जहां सोशल मीडिया पर खूब तारीफ मिली, वहीं आलोचना भी झेलनी पड़ी. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वह लाइक्स और व्यूज के लिए नदी की सफाई के वीडियो बना रहे हैं.
बिट्टू ने इसका जवाब अपने काम से दिया. उन्होंने नदी की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें और वीडियो लगातार शेयर किए.
बाद में ब्यावरा नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम ने भी सोशल मीडिया पर शेयर की गई उनकी पहले और बाद की तस्वीरों को वास्तविक बताया.
फिर सामने आया 'अकेले सफाई' का विवाद
बिट्टू की कहानी वायरल होने के बाद जब अजनार नदी की सफाई को लेकर ग्राउंड पर पड़ताल हुई तो दूसरा पक्ष भी सामने आया.
अजनार बचाओ समिति और स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी की सफाई का काम सिर्फ एक व्यक्ति ने नहीं किया है. उनका कहना है कि 2016 से अजनार बचाओ समिति और नगर पालिका मिलकर हर साल नदी सफाई अभियान चलाते रहे हैं. देखें VIDEO:-
समिति के अनुसार, बिट्टू तबाही भी समिति के सदस्य हैं और सफाई अभियान में सहयोग करते रहे हैं. समिति का कहना है कि वह सोशल मीडिया पर रील बनाने के शौकीन हैं, जबकि नदी की सफाई सामूहिक प्रयास से होती रही है.

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि नदी की सफाई में शहरवासियों का योगदान रहा है और बारिश के तेज बहाव से भी काफी कचरा बहा है. इस वजह से अब सवाल उठ रहा है कि अजनार नदी को साफ करने का श्रेय आखिर किसी एक व्यक्ति को दिया जाए या इसमें सामूहिक प्रयास को भी सामने रखा जाए.

बिट्टू बोले- सभी का सहयोग रहा, लेकिन मैं रोज पहुंचता था
विवाद के बीच बिट्टू तबाही का भी पक्ष सामने आया है. उनका कहना है कि नदी की सफाई में सभी का सहयोग रहा है. समिति के सदस्य भी कभी-कभी सफाई के लिए आते थे, लेकिन वह खुद रोज नदी पर पहुंचते थे और सफाई करते थे. यानी मामला अब 'किसने सफाई की' से आगे बढ़कर 'किसने कितना योगदान दिया' की बहस में बदल गया है.

सफाई अभियान में नगरपालिका भी उतरी
बिट्टू की पहल के बाद नगर पालिका भी सफाई अभियान में शामिल हुई. नदी में जमा पुराने कचरे और मलबे को हटाने के लिए जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया गया.

नगरपालिका के अधिकारी के मुताबिक, बिट्टू ने सफाई की शुरुआत की और बाद में स्थानीय लोगों ने भी योगदान दिया. बारिश के दौरान तेज पानी के बहाव से बचा हुआ कुछ मलबा भी बह गया. यानी एक युवक द्वारा शुरू की गई पहल धीरे-धीरे सामूहिक सफाई अभियान का रूप लेती गई. लेकिन अजनार नदी की असली समस्या कहीं ज्यादा बड़ी है.

नदी से प्लास्टिक और कचरा हटाना एक बात है, लेकिन अजनार की समस्या सिर्फ इतनी नहीं है.
नगरपालिका अधिकारी के मुताबिक, ब्यावरा की अजनार नदी में पांच बड़े नालों का गंदा पानी पहुंचता है. जब तक इन नालों के पानी को नदी में जाने से नहीं रोका जाएगा, तब तक सिर्फ सफाई करने से समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होगी.
इसी को देखते हुए करीब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य नदी में पहुंच रहे बिना उपचार वाले गंदे पानी की समस्या को कम करना है.
आनंद महिंद्रा से लेकर मुख्यमंत्री तक ने की तारीफ
बिट्टू की मेहनत की चर्चा मार्च 2026 में देशभर में तब हुई, जब उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उनके काम की सराहना की. सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना भी हुई थी, लेकिन आनंद महिंद्रा ने उनके प्रयास को सकारात्मक उदाहरण बताया और इसे अपने 'मंडे मोटिवेशन' के तौर पर शेयर किया. इसके बाद बिट्टू की कहानी और तेजी से लोगों तक पहुंची.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी बिट्टू से मुलाकात कर अजनार नदी की सफाई के उनके प्रयास की सराहना की. मुख्यमंत्री ने उनके जज्बे को प्रेरणादायक बताया और जल संरक्षण तथा पर्यावरण से जुड़े ऐसे प्रयासों में सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया.
अब केविन पीटरसन भी हुए मुरीद
बिट्टू की कहानी अब सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रही. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने भी सोशल मीडिया पर उनके काम की तारीफ की. पीटरसन ने बिट्टू की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें साझा करते हुए उनके प्रयास को शानदार बताया. उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि एक 21 वर्षीय युवक ने प्रदूषित नदी में उतरकर बदलाव की शुरुआत की.
इसके बाद बिट्टू की कहानी को इंटरनेशनल लेवल पर भी पहचान मिलने लगी.
नीदरलैंड्स से आया बड़ा ऑफर
अब इस कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ आया है. बिट्टू की नदी सफाई से जुड़ी पहले और बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की गईं. यह पोस्ट बॉयन स्लैट तक पहुंची. स्लैट नीदरलैंड्स की संस्था The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO हैं, जो समुद्रों और नदियों में प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए काम करती है.
पोस्ट देखने के बाद स्लैट ने बिट्टू को सिर्फ तीन शब्दों में जवाब दिया- ''हमारे साथ काम करो.''
हालांकि, यह फिलहाल सोशल मीडिया पर दिया गया एक सीधा निमंत्रण है. यह साफ नहीं है कि बिट्टू ने इसे स्वीकार किया है या नौकरी अथवा किसी औपचारिक सहयोग को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू हुई है.
ब्यावरा से निकली कहानी पहुंची दुनिया तक
अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई बिट्टू तबाही की कहानी अब एक दिलचस्प मोड़ पर है.
एक तरफ उनके अकेले सफाई करने के दावे को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और अजनार बचाओ समिति तथा स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी की सफाई सामूहिक प्रयासों का नतीजा है. दूसरी तरफ बिट्टू का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रोज सफाई की और उनका मकसद नदी को साफ करना था.
इन तमाम दावों और विवादों के बीच एक चीज साफ है कि अजनार नदी की गंदगी का मुद्दा अब ब्यावरा से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन चुका है.
जिस युवक ने 26 जनवरी को नदी में उतरकर सफाई शुरू की थी, उसकी तस्वीरें आनंद महिंद्रा और केविन पीटरसन जैसे नामों तक पहुंचीं और अब The Ocean Cleanup के संस्थापक बॉयन स्लैट ने उसे अपने साथ काम करने का खुला न्योता दिया है.
और शायद इस पूरी कहानी की सबसे खास बात यही है कि 'बिट्टू तबाही' नाम से सोशल मीडिया पर पहचान बनाने वाला यह युवक अब किसी और तरह की तबाही नहीं, बल्कि नदी में फैले प्रदूषण को खत्म करने की कोशिश के लिए जाना जा रहा है.