मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की उस महिला कार्यकर्ता को कोर्ट के समक्ष पेश करने या फिर मंगलवार तक उसके परिवार के पास पहुंचाने का आदेश दिया है, जिसे दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जाते समय ट्रेन से हिरासत में ले लिया गया था. यह आदेश चीफ जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने हिरासत में ली गई महिला प्रीति लोंढे की बहन विशाखा प्रशांत लोंढे की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
दरअसल, महाराष्ट्र से गोवा एक्सप्रेस में सवार होकर CJP कार्यकर्ता दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे.
जैसे ही गोवा एक्सप्रेस ट्रेन नर्मदापुरम जिले के इटारसी जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर शाम लगभग 6 बजे पहुंची, पहले से सतर्क रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जिला पुलिस ने पूरे जनरल कोच को घेर लिया. पुलिस ने ट्रेन से प्रीति लोंधे सहित कुल 15 CJP सदस्यों को नीचे उतार लिया और हिरासत में लेकर किसी गोपनीय स्थान पर भेज दिया.
SP के निर्देश पर भारी पुलिस बल तैनात
नर्मदापुरम जिला पुलिस अधीक्षक (SP) साईं कृष्ण को सूचना मिली थी कि गोवा एक्सप्रेस के जनरल कोच में बड़ी संख्या में CJP सदस्य सवार होकर दिल्ली जा रहे हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक है. इस सूचना के आधार पर भोपाल और नर्मदापुरम जिले के थानों से बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को इटारसी रेलवे स्टेशन पर बुलाया गया था.
पुलिस कार्रवाई से नाराज CJP सदस्यों ने ट्रेन और प्लेटफॉर्म पर जमकर विरोध और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा किया. पुलिस ने एक-एक कर 15 सदस्यों की जांच कर उन्हें हिरासत में लिया और पुलिस वाहनों में बैठाकर गोपनीय स्थल पर ले गई. देखें VIDEO:-
मंगलवार तक अल्टीमेटम
शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी किया. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार प्रीति लोंधे को कोर्ट के सामने पेश करे.
अदालत ने सरकार को यह सहूलियत भी दी कि यदि वह चाहे तो मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई से पहले भी महिला को कोर्ट में पेश कर सकती है या फिर उसकी उसके परिजनों के पास सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करा सकती है, बशर्ते इसकी अग्रिम सूचना याचिकाकर्ता (दूसरी पार्टी) को दे दी जाए.