scorecardresearch
 

क्या दतिया सीट पर तीसरी बार होगा चुनाव? कांग्रेस MLA घनश्याम सिंह की विधायकी पर संकट, छिपे आरोप पर मचा घमासान

Datia MLA Ghanshyam Singh Case: दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की विधायकी पर कानूनी संकट! 1991 के मामले की जानकारी छिपाने के आरोप में जबलपुर HC में याचिका. विधायक ने बताया राजेंद्र भारती व BJP की साजिश. पूरी खबर पढ़ें...

Advertisement
X
दतिया विधायक पर 33 साल पुरानी FIR हलफनामे में छिपाने का आरोप.(File Photo:ITG)
दतिया विधायक पर 33 साल पुरानी FIR हलफनामे में छिपाने का आरोप.(File Photo:ITG)

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर सियासी और कानूनी चर्चा के केंद्र में है. उपचुनाव जीतकर विधायक बने कांग्रेस नेता घनश्याम सिंह के निर्वाचन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. बीजेपी नेता दीपक बेलपत्री ने वकील शिवम गौतम के माध्यम से याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने चुनावी हलफनामे में 1991 में दर्ज एक FIR की जानकारी नहीं दी.

हालांकि, इस मामले में अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि घनश्याम सिंह की विधायकी जाएगी या दतिया में दोबारा उपचुनाव की स्थिति बनेगी.

क्या है 1991 की FIR का मामला?

याचिका में जिस पुराने मामले का जिक्र किया गया है, वह मई 1991 का बताया जा रहा है. उस समय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम हुआ था. आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने 22 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की थी, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी देना जरूरी है और 1991 के इस मामले का उल्लेख नहीं किया गया.

घनश्याम सिंह के चुनावी हलफनामे को लेकर जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज होने का उल्लेख किया गया था

Advertisement

घनश्याम सिंह बोले- विरोधियों की साजिश

विधायक घनश्याम सिंह ने इस याचिका को विरोधियों की साजिश बताया है. उनका कहना है कि उन्हें 1991 के किसी ऐसे मामले की जानकारी नहीं थी और उस समय पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उन्हें निरोध में लेकर बाद में छोड़ दिया था.

घनश्याम सिंह का दावा है कि याचिका दायर करने वाले लोगों के राजनीतिक संबंध उनके विरोधियों से जुड़े हैं. उन्होंने पूर्व विधायक राजेंद्र भारती और बीजेपी प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी का नाम लेते हुए इसे उनके खिलाफ की जा रही साजिश बताया है. ये आरोप विधायक के अपने बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस मामले में अब तक पुलिस या अदालत की ओर से कोई नोटिस या समन नहीं मिला है.

30 जुलाई को हुआ था उपचुनाव

दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को उपचुनाव हुआ था और 3 अगस्त को परिणाम घोषित किया गया. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से हराया था. घनश्याम सिंह को 66,757 और आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले थे.

यह उपचुनाव तत्कालीन कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था. कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा, जबकि बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था.

Advertisement

अब हाईकोर्ट में तय होगा आगे का रास्ता

घनश्याम सिंह की विधायकी को चुनौती देने वाली याचिका अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है. याचिका में 1991 की FIR को चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर नहीं बताए जाने को आधार बनाया गया है, जबकि विधायक का कहना है कि उन्होंने कोई तथ्य जानबूझकर नहीं छिपाया.

अब हाईकोर्ट में इस याचिका पर होने वाली सुनवाई और अदालत के फैसले से ही स्पष्ट होगा कि इस पुराने मामले का घनश्याम सिंह के निर्वाचन पर क्या कानूनी असर पड़ता है. फिलहाल उनकी विधायकी को लेकर अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय पर निर्भर है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement