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साइबर क्राइम की दुनिया को सरल तरीके से समझाती किताब

चित्रदीप चक्रवर्ती की किताब 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' साइबर अपराध की जटिलताओं को समझाने वाली एक महत्वपूर्ण नॉन-फिक्शन रचना है.

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जामतारा कॉलिंग: द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम
जामतारा कॉलिंग: द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम

कुछ किताबें हमें केवल एक कहानी नहीं सुनातीं, बल्कि हमारे भीतर छिपे सवालों को भी जगाती हैं. चित्रदीप चक्रवर्ती की किताब 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' भी ऐसी ही रचना है, जिसे रूपा प्रकाशन ने प्रकाशित किया है. आज की दुनिया में साइबर शब्द अब किसी के लिए नया नहीं रहा. खासतौर पर तब, जब नाम जामतारा का आता है.

लेखक चित्रदीप चक्रवर्ती पत्रकार हैं, तो लाजिमी है कि इस रचना में पाठक को उन तमाम सवालों का जवाब मिलता है, जो उसके मन में उठते हैं. चित्रदीप बताते हैं कि पत्रकारिता के पेशे में 'क्राइम बीट' उनका पसंदीदा है और यह बात उनकी लेखनी से भी साबित होती है. लेखक ने साफ तौर पर जाहिर किया है कि डिजिटल तकनीक ने जहां मानव जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराध की दुनिया को भी व्यापक मंच दिया है. मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध आज गंभीर चुनौती बन चुका है.

जब 2016 में प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान किया और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने की बात कही, तो इसे साइबर वर्ल्ड में खुशी की लहर सी दौड़ गई. ऐसा इसलिए कि उनके लिए फ्रॉड के मौके ज्यादा बन गए. ऐसे समय में साइबर क्राइम विषय पर लिखी 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' न सिर्फ कानून या तकनीक की जानकारी देने वाली किताब है, बल्कि डिजिटल वर्ल्ड के खतरों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाती है.

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ये किताब लेखक की नॉन फिक्शन रचना है. कहानी झारखंड के जामतारा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे लेखक ने अपनी यात्रा के जरिए बयां किया है. इस कहानी के रास्ते में साइबर क्राइम की दुनिया के एक-से-एक पात्रों से परिचय मिलता है, जिसे बड़े ही करीने से पिरोया गया है. हर किरदार अपने आप में एक कहानी है.

चाहे वह गाड़ी का ड्राइवर सुरेश हो या बिकास या असगर या फिर अल्ताफ अंसारी उर्फ रॉकस्टार... सभी की स्टोरी साइड में चल रही किसी रुपहले पर्दे के कथानक जैसा लगता है. यहां सबकी अपनी-अपनी कहानी है. सुरेश कैसे इस दलदल में आया और आखिर उसकी पत्नी ने क्या कहा कि वह इससे बाहर आया. फिर जामतारा का यह नाम कैसे पड़ा? इस इलाके में लोगों की आजीविका का साधन क्या था? फिर 'जहरखुरानी गैंग' कैसे पनपा? यह धंधा जब ढीला पड़ा तो किस तरह लोगों को रिचार्ज के नाम पर झांसा देना और इस प्रक्रिया में यह इलाका इतना आगे बढ़ गया कि जामतारा महज झारखंड नहीं, बल्कि दुनिया की नजरों में सबसे ज्यादा सुर्खियां बंटोरने वाली जगह बन गया. साइबर क्राइम का पर्याय बन गया जामतारा.

इस पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लेखक साइबर अपराध को केवल तकनीकी समस्या के रूप में नहीं देखते. उनके अनुसार यह अपराध सामाजिक व्यवहार, आर्थिक गतिविधियों और व्यक्तिगत गोपनीयता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है. इसमें यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किस तर एक आम इंटरनेट यूजर्स भी अनजाने में साइबर अपराधियों का शिकार बन सकता है.

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'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' की सबसे बड़ी ताकत इसकी समसामयिकता है. ऐसे दौर में जब डिजिटल भुगतान और सोशल मीडिया आम जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, साइबर सुरक्षा की जानकारी केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रह सकती. ऐसे में यह किताब पाठकों को जागरूक करने का काम भी करती है.

अगर भाषाई तौर पर देखें, तो यह किताब भले ही अंग्रेजी भाषा में लिखी गई हो, लेकिन यह आसानी से आम पाठक को समझ में आने वाली है.लेखक ने वाक्य विन्यास को कठिन की जगह सरल रखा है. लंबे-लंबे वाक्य या पैराग्राफ अकसर किसी भी कहानी या किताब को बोझिल बनाते हैं, लेकिन इसमें ऐसा नहीं है.

एक खासियत यह भी कि देशज शब्दों का प्रयोग वहां के देशकाल और समाज को देखते हुए किया है. यह एक तरह से ज्ञानवर्धक भी है पाठक को किसी जगह विशेष की नई बोलियों या शब्दों से परिचय मिलता है. मसलन, 'टटलू काटना'. लेखक ने इसका मतलब भी बताया है- लोगों को बेवकूफ या मूर्ख बनाना. साइबर क्राइम करने वालों के लिए यह शब्द जामतारा में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ शब्दों को सुनकर चेहरे पर मुस्कान भी आती है. मसलन- पुलिस वालों के लिए इस्तेमाल किया गया, 'सरकारी मेहमान'.

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कुल मिलाकर, 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम' साइबर अपराध की दुनिया को समझने के लिए प्रासंगिक पुस्तक है.  12 अध्याय और 197 पेज की इस किताब की सबसे बड़ी सफलता यही है कि यह पाठक को केवल साइबर अपराध की जानकारी नहीं देती, बल्कि डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने की चेतना भी पैदा करती है.

यह आज के वक्त में हर किसी के लिए उपयोगी पुस्तक है. वजह यह कि आज जब हमारी बैंकिंग, पहचान, निजी तस्वीरें, दस्तावेज और सामाजिक संबंध तेजी से डिजिटल होते जा रहे हैं, तब साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है. यह हर नागरिक की जरूरत बन चुकी है.

बुकः 'जामतारा कॉलिंगः द अंडरबेली ऑफ साइबर क्राइम'
लेखकः चित्रदीप चक्रवर्ती
पब्लिशरः रूपा पब्लिकेशन
मूल्य- 295

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