Pankaj Bhadouria Bald Photos: कैंसर और कीमोथेरेपी का दर्द इंसान को अंदर तक तोड़ सकता है. इस दौरान बाल खूब झड़ते हैं. कई बार तो लोग पूरी तरह से गंजे हो जाते हैं. इस दौरान अपना बदला हुआ रूप स्वीकार करना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता. लेकिन 'मास्टरशेफ इंडिया' फेम पंकज भदौरिया ने इस मुश्किल दौर में हिम्मत और आत्मविश्वास की नई मिसाल पेश की है. कीमोथेरेपी के चलते उनके बाल पूरी तरह से चले गए हैं, लेकिन उन्होंने अपने इस रूप को छिपाने के बजाय इसे अपनाया और सज-संवरकर दुनिया के सामने आने का फैसला किया.
विजयदशमी के मौके पर पंकज ने अपनी कुछ तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें वह बिना बालों के, माथे पर लाल बिंदी लगाए और पारंपरिक अंदाज में सजी नजर आईं. उनका ये अंदाज जितना खूबसूरत है, उसके पीछे छिपा दर्द और खुद को दोबारा स्वीकार करने का जज्बा उतना ही भावुक कर देने वाला है. उनकी ये तस्वीरें और उनमें लिखा मैसेज देखकर किसी का भी भावुक हो जाना तय है.
कीमोथेरेपी ने छीने बाल
मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने अपने पोस्ट में बताया कि कीमोथेरेपी के कारण उनके बाल चले गए हैं. इस बदलाव का असर सिर्फ उनकी शारीरिक बनावट पर नहीं पड़ा, बल्कि धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास पर भी असर होने लगा. उन्हें इस बात का डर सताने लगा कि जब वो दुनिया के सामने जाएंगी, तो लोग उन्हें किस नजर से देखेंगे.
हालांकि, अब पंकज इस डर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने लिखा कि अब वह आईने में खुद को देखकर उस महिला के प्रति ज्यादा प्यार और नरमी महसूस करना चाहती हैं, जिसने जिंदगी में इतना कुछ सहा है. उनका मानना है कि वह भी खूबसूरत महसूस करने, लोगों के सामने आने और जिंदगी का जश्न मनाने की हकदार हैं.
सोलह श्रृंगार में दिखा नया रूप
पंकज की तस्वीरों में उनका बदला हुआ लुक सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है. सिर पर बाल नहीं हैं, लेकिन माथे पर लाल बिंदी और चेहरे पर मेकअप करके वह किसी दुल्हन की तरह सजी दिख रही हैं. उन्होंने अपने इस रूप को छिपाने के बजाय इसे स्वीकार करने का फैसला किया है.
उनकी तस्वीरों में ट्रेडिशनल साड़ी और श्रृंगार वाला लुक भी देखने को मिलता है. उनका अंदाज बताता है कि बाल न होने से किसी महिला की खूबसूरती कम नहीं होती. कीमोथेरेपी की वजह से आए इस बदलाव के बाद भी पंकज ने सजना-संवरना और खुशियां मनाना नहीं छोड़ा.
'अब मैं जैसी हूं, वैसे ही दुनिया से मिलने को तैयार हूं'
पंकज ने अपने पोस्ट में लिखा, 'कीमो ने मेरे बाल छीन लिए. और कहीं न कहीं, इस सफर में मेरे अंदर का डर, मेरा आत्मविश्वास भी छीनने लगा था. खुद की तरह रहने और इस चिंता के बिना बाहर निकलने का आत्मविश्वास कि दुनिया मुझे किस नजर से देखेगी.'
उन्होंने आगे लिखा कि अब ऐसा नहीं होगा. आज वह आईने में खुद को देखकर उस महिला के प्रति ज्यादा दयालु होना चाहती हैं, जो बहुत कुछ झेल चुकी है. वह खूबसूरत महसूस करने, लोगों के सामने आने और जिंदगी का जश्न मनाने की हकदार है.
पंकज ने लिखा कि इस विजयदशमी पर उनकी जीत पर्सनल है. ये अपने डर, झिझक और उस शर्म पर जीत है, जिसे उन्हें कभी अपने साथ लेकर चलने की जरूरत ही नहीं थी. उन्होंने कहा कि अब वो अपने बिना बालों वाले सिर, लाल बिंदी और दोबारा हिम्मत जुटाते दिल के साथ दुनिया से मिलने के लिए तैयार हैं.
मां दुर्गा को दिया अपनी हिम्मत का श्रेय
पंकज ने अपने इस सफर में मिली हिम्मत के लिए मां दुर्गा का आभार भी जताया. उन्होंने लिखा, 'धन्यवाद मां, मुझे यह ताकत देने के लिए. मुझे दोबारा खुद को प्यार से देखना सिखाने के लिए.' उनके लिए विजयदशमी इस बार सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुद को स्वीकार करने और भीतर के डर पर जीत हासिल करने का मौका है. पंकज ने अपने पोस्ट के आखिर में सिंदूर खेला का जिक्र करते हुए लिखा, 'कल सिंदूर खेला में मिलते हैं!'