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रील्स ने बिगाड़ा Gen Z का शेड्यूल! रिसर्च ने बताया क्यों भटक रहा ध्यान

जेन जी की जिंदगी में सोशल मीडिया और इंटरनेट अहम हिस्सा बन चुके हैं. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक फोन का इस्तेमाल आम है. लेकिन लगातार रील्स देखना, नोटिफिकेशन चेक करना और बार-बार स्क्रीन पर जाना ध्यान लगाने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. जानिए रिसर्च इस आदत के बारे में क्या कहती है और कैसे दोबारा फोकस बढ़ाया जा सकता है.

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जेन जी का अटेंशन स्पेन क्यों हो रहा कम?
जेन जी का अटेंशन स्पेन क्यों हो रहा कम?

सुबह उठते ही फोन चेक करना, खाली वक्त में रील्स देखना और किसी काम के बीच बार-बार नोटिफिकेशन पर नजर डालना. जेन जी की डेली लाइफ में ये आदतें आम हो चुकी हैं. सोशल मीडिया ने युवाओं को दुनिया से जोड़ने के कई मौके दिए हैं, लेकिन क्या हर वक्त ऑनलाइन रहने की आदत उनके ध्यान लगाने की क्षमता को भी प्रभावित कर रही है?

क्या कहती है रिसर्च?

अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर की दिसंबर 2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वहां 13 से 17 साल के करीब 40% यंगस्टर्स का कहना है कि वे लगभग हर समय इंटरनेट पर रहते हैं. वहीं, 97% किशोर रोज इंटरनेट का यूज करते हैं. ये आंकड़ा बताता है कि जेन जी की जिंदगी में इंटरनेट कितनी गहराई से शामिल हो चुका है.

साल 2025 में पब्लिश्ड एक रिसर्च रिव्यू में भी सोशल मीडिया के इस्तेमाल और बच्चों व युवाओं की दिमागी क्षमता के बीच संबंधों को स्टडी किया गया. इसमें शामिल 23 स्टडी के नतीजों के मुताबिक, सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ध्यान लगाने, याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता.

बार-बार फोन देखने से कैसे टूटता है फोकस?

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इसकी एक बड़ी वजह है लगातार मिलने वाले नोटिफिकेशन. पढ़ाई या काम करते वक्त फोन पर मैसेज आने से ध्यान भटक सकता है. इसके बाद दोबारा उसी काम पर ध्यान लगाने में वक्त है. वहीं, छोटी-छोटी रील्स और तेजी से बदलते वीडियो देखने की आदत युवाओं को लगातार नया कंटेंट देखने के लिए प्रेरित कर सकती है.

अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की एक रिपोर्ट में भी बताया गया है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, मैसेज और नोटिफिकेशन युवाओं का ध्यान भटका सकते हैं. एक साथ कई काम करने की आदत भी एकाग्रता पर असर डाल सकती है.

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कैसे वापस पा सकते हैं अपना फोकस?

इसका मतलब ये नहीं है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए. जरूरत है इसके इस्तेमाल का तरीका बदलने की. काम या पढ़ाई के दौरान फोन को साइलेंट रखना, नोटिफिकेशन बंद करना, लगातार रील्स देखने के बजाय तय वक्त पर सोशल मीडिया चलाना और पर्याप्त नींद लेना मददगार हो सकता है.

इंटरनेट प्रॉब्लम नहीं है, बल्कि उसका जरूरत से ज्यादा और बिना किसी कंट्रोल के इस्तेमाल परेशानी बन सकता है. जेन जी के लिए जरूरी है कि वे ऑनलाइन दुनिया से जुड़े रहें, लेकिन अपना ध्यान और वक्त उसके हवाले न करें.

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