आज देशभर में धूमधाम से दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है. दिवाली रोशनी, खुशहाली और समृद्धि का त्योहार है. मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. उनके स्वागत के लिए लोग घर-आंगन को दीपों से सजाते हैं. कहते हैं कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी के विधिवत पूजन से धनधान्य में वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है. दीपावली का संबंध भगवान श्रीराम के वनवास से लौटकर अयोध्या आने से भी है. उनके स्वागत में अयोध्या वासियों ने दीप जलाए थे. तभी से यह पर्व प्रकाश और उत्सव का प्रतीक बन गया. आइए जानते हैं दिवाली पर आज लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है.
दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम घड़ी माना जाता है. प्रदोष काल आज शाम 5 बजकर 34 मिनट से शाम 8 बजकर 09 मिनट तक रहने वाला है. यानी शुभ मुहूर्त में पूजा के लिए आपको करीब 2 घंटे 35 मिनट का समय मिलने वाला है. इस बीच शाम 5 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 50 मिनट तक वृषभ काल भी रहेगा. आप चाहें तो इस अबूझ मुहूर्त में भी लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं.
दिवाली 2026 तिथि और मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, रात 12:31 बजे
दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026, रविवार
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
वृषभ काल: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
निशीथ काल: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक
दीपावली की रात क्यों मानी जाती है खास?
दीपावली की रात को महानिशा भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस रात मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. जो भक्त इस समय पूरी श्रद्धा से मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं, उनकी प्रार्थना स्वीकार होती है. विधि विधान से पूजा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है. पूरे साल घर में सुख-शांति और शुभ-लाभ बना रहता है. इसलिए दीपावली को धन और समृद्धि की कामना के लिए खास अवसर माना जाता है.
क्यों लक्ष्मी के साथ होती है गणपति की पूजा?
मां लक्ष्मी को धन और संपत्ति की देवी माना जाता है. ज्योतिष में उनका संबंध शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि मां लक्ष्मी की आराधना से धन और वैभव की प्राप्ति होती है. वहीं, भगवान गणेश के साथ उनकी पूजा करने से धन के साथ बुद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है. यानी लक्ष्मी पूजा से आपको धन मिलेगा, लेकिन उसके सही प्रयोग के लिए बुद्धि गणपति ही देंगे. मां लक्ष्मी की कृपा से धन के अलावा मान-सम्मान और यश भी मिलता है. उनकी पूजा को दांपत्य जीवन में सुख और खुशहाली के लिए भी शुभ माना जाता है.
मां लक्ष्मी की प्रिय चीजें और भोग
कमल का फूल और कमल गट्टा कमल मां लक्ष्मी का सबसे प्रिय पुष्प है. कमल गट्टे की माला से पूजन व मंत्र जाप से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है. इन्हें अर्पित करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती है. माता लक्ष्मी को चावल की खीर और मखाना अत्यंत प्रिय है. साथ ही खील, बताशा, नारियल और मीठा पान भी मां को अर्पित कर सकते हैं.
कैसे करें दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा?
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए. इसके लिए सबसे पहले घर की पूर्व दिशा या ईशान कोण में एक चौकी स्थापित करें. चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का कपड़ा बिछाएं. अब चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें. इसके बाद उनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. आसन पर बैठकर अपने चारों ओर जल छिड़कें. इसके बाद पूजा का संकल्प लें और आराधना शुरू करें. पूजा स्थल पर घी का एक मुखी दीपक जलाएं.
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूल और मिठाई अर्पित करें. सबसे पहले भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. अंत में दोनों देवी-देवताओं की आरती उतारें और शंख बजाएं. घर में दीपक जलाने से पहले एक थाली में पांच दीपक रखें. इन पर फूल आदि चढ़ाकर पूजा करें. इसके बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाएं. घर के अलावा मंदिर और कुएं के पास भी दीपक जलाने की परंपरा है.
दीपक जलाते समय इस मंत्र का करें जाप
दीपक के बिना दीपावली संभव ही नहीं है. दीपावली पर दीपक जलाकर नकारात्मकता को दूर किया जाता है. मुख्य पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी के सामने एक मुखी दीपक जलाएं. जबकि गणपति के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं. बाकी जगहों पर भी सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं. पूजा के स्थान पर मिटटी का एक चौमुखी दीपक जलाएं. इसके बाद इस मंत्र का जाप करें- "शुभम करोति कल्याणं , आरोग्यं धन सम्पदा। शत्रु बुद्धि विनाशाय , दीपं ज्योति नमोस्तुते।"
श्री लक्ष्मी माता की आरती
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख सम्पत्ति दाता।।
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
मैया जो कोई जन गाता।।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।