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Diwali 2026: बस कुछ देर में शुरू होगी दिवाली की पूजा, मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए जरूर पढ़ें ये चालीसा

Lakshmi Chalisa in Hindi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त कुछ ही देर में शुरू होने वाला है. इस खास मौके पर देवी की आराधना के साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न भूलें. यहां पढ़ें पूरी चालीसा.

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श्री लक्ष्मी चालीसा पाठ (Photo: ITG)
श्री लक्ष्मी चालीसा पाठ (Photo: ITG)

Lakshmi Chalisa in Hindi: दिवाली पर मां लक्ष्मी की आराधना का खास महत्व होता है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ देवी के मंत्रों का जाप और आरती करने की भी परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है. इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है. इस शुभ अवसर पर लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी बेहद मंगलकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा के साथ चालीसा पढ़ने से जीवन में खुशहाली और धन-धान्य की प्राप्ति होती है. यहां जानिए श्री लक्ष्मी चालीसा का पूरा पाठ.

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस साल दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए शाम का समय शुभ माना गया है. पूजा के लिए कुल 1 घंटे 56 मिनट का समय मिलेगा.

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:53 से 7:49 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:30 से रात 8:08 बजे तक
निशिता काल: रात 11:38 से 9 नवंबर की रात 12:30 बजे तक

पूरी श्री लक्ष्मी चालीसा यहां पढ़ें

॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पूरवहु मेरी आस॥

॥ चौपाई ॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

नमो नमो लक्ष्मी महारानी।
नमो नमो जगत जननी भवानी॥

सिंधु सुता मैं सुमिरौं तोही।
ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥

तुम समान नहिं कोउ उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

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जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥

तुम ही हो सब घट की वासी।
विनती यही हमारी खासी॥

जग जननी जय सिंधु कुमारी।
दीनन की तुम हो हितकारी॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।
सुधि लीजै अपराध बिसारी॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।
जगत जननि विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।
संकट हरहु हमारी माता॥

क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिंधु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।
रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥

तब तुम प्रकट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनायो तोहि अंतर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन के स्वामी॥

तुम सब प्रबल शक्ति नहिं आनी।
कहं तक महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित फल पावै भाई॥

तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भांति मन लाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करे मन लाई॥

ताको कोई कष्ट न होई।
मन इच्छित फल पावै सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणी।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥

जो यह पढ़ै और पढ़ावै।
धन संपत्ति नाना विधि पावै॥

॥ दोहा ॥

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त्राहि त्राहि दुःख हारिणी, हरहु बेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करहु शत्रु को नाश॥


 

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