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NEET पेपर लीक: छात्रों पर पुलिस बर्बरता के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी. पुलिस पर लाठीचार्ज और बर्बरता का आरोप है. 24 जुलाई को CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी.

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शनिवार को CJP ने 36 दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया. (File Photo: PTI)
शनिवार को CJP ने 36 दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया. (File Photo: PTI)

NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस की कथित बर्बरता के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सोमवार को दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट की 27 जुलाई की कॉज लिस्ट के मुताबिक, ये याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने सूचीबद्ध हैं. इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं.

दरअसल, 24 जुलाई को CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मामले का तत्काल जिक्र करते हुए कहा था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने बताया था कि देशभर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं.

20 जुलाई को दिल्ली में हुआ था टकराव

NEET पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कई राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन किया था. दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई थी. संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था.

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प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन खत्म

शनिवार को CJP ने 36 दिनों से चल रहे अपने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया. यह फैसला धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से उनकी अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद लिया गया. धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के बयान में कहा था कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उन्हें गहरा दुख हुआ है और यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है.

दिल्ली हाई कोर्ट भी मांग चुका है जवाब

इससे पहले 22 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था. हाई कोर्ट ने अधिकारियों को पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था. इसमें सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और घटना की वीडियोग्राफी समेत अन्य संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं.

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