कर्नाटक में वोटर लिस्ट के SIR अभियान के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी आपत्तियां और फॉर्म-7 जमा किए जाने के मामले में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
निर्वाचन आयोग ने सभी ईआरओ (EROs) को निर्देश दिया है कि फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर झूठे बयान या फर्जी दावे पेश करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए.
इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि राज्य में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों समेत करीब 45 लाख पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है.
CM का चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना
इसके तहत थोक में 'प्री-प्रिंटेड' फॉर्म-7 यानी नाम काटने के आवेदन गैर-कानूनी तरीके से जमा किए जा रहे हैं. इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री और राज्य के कई मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग के दफ्तर के बाहर जमकर धरना दिया था, जिसके बाद आयोग ने ये कार्रवाई की है.
डी.के. शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने उन्हें ये भरोसा दिलाया है कि फॉर्म 6, 6A, 7 और 8 में जानबूझकर फर्जी दावे या आपत्तियां दर्ज कराने वाले आवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने इस पूरी घटना को पात्र मतदाताओं के खिलाफ एक 'बड़ा आपराधिक षड्यंत्र' करार दिया. इसके साथ ही साफ किया कि सरकार हर एक मतदाता के अधिकारों की रक्षा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगी.
फर्जी फॉर्मों की शिकायतों की होगी जांच
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजा है. इसमें ये आदेश दिया है कि फर्जी फॉर्मों की शिकायतों पर कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले एक विस्तृत जांच जरूर की जाए, ताकि ये तय हो सके कि किसी भी असली और योग्य मतदाता का नाम गलती से भी लिस्ट से न कटे.
आयोग के मुताबिक, जिन इलाकों में भारी संख्या में नाम हटाने के आवेदन मिले हैं- जैसे विजयनगर, विजयपुरा, चिकमगलूर (मुदिगिरे), बेलगावी और बीदर. इनके प्रशासनिक अधिकारियों को खासतौर पर सतर्क रहने को कहा गया है. उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वो हर दावे और आपत्ति का खुद वेरिफिकेशन करें.
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चुनाव आयोग ने ये भी बताया है कि बिना किसी ठोस और वैध आधार के दी गई सभी फर्जी आपत्तियों को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा. साथ ही, इस तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले तत्वों को सख्त कार्रवाई और FIR का सामना करना पड़ेगा