scorecardresearch
 

उड़ते पक्षी मर जा रहे थे... उस दिन क्या हालात थे, जब पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी?

धरती पर एक जगह ऐसी भी है, जहां सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है और एक समय ऐसा भी आया जब वहां बढ़ते तापमान ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. उस जगह की हालत ऐसी हो गई थी कि आसमान में उड़ने वाले पंछी भी हद से ज्यादा ताप की वजह से मरने लगे थे.

Advertisement
X
दुनिया में अबतक की रिकॉर्ड गर्मी जहां पड़ी थी, वहां उड़ती चिड़ियां भी मरकर नीचे गिरने लगी थीं (Photo - AI Generated)
दुनिया में अबतक की रिकॉर्ड गर्मी जहां पड़ी थी, वहां उड़ती चिड़ियां भी मरकर नीचे गिरने लगी थीं (Photo - AI Generated)

गर्मी से हम इंसान तो काफी परेशान हो जाते हैं. क्या कभी सोचा है कि इसका असर पशु-पक्षियों पर भी होता है. तपती दोपहरी में हीट वेव और लू की वजह से लोगों के घातर रूप से बीमार होने की खबर तो आम है, लेकिन कभी ऐसी भी गर्मी पड़ी थी जब आसमान में उड़ने वाले पक्षी भी सूरज के भीषण ताप की वजह से मर जा रहे थे. तो चलिए जानते हैं, उस गर्मी की कहानी, जिसने अब तक के सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया था. 

इन दिनों पूरे यूरोप में भीषण गर्मी की खबर सुर्खियों में है. हालांकि, वहां पारा 40 डिग्री तक ही पहुंचा है, लेकिन, वहां के लोगों के लिए ये जानलेवा साबित हो रहा है. क्योंकि, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी जैसे यूरोपियन कंट्री आमूमन ठंडे प्रदेश माने जाते हैं. ऐसे में वहां के लोगों के लिए इतना तापमान भी जानलेवा बन जाता है. 

इन देशों में गर्मी की वजह से पूरा जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है. सरकारों को रेड अलर्ट जारी करने पड़ रहे हैं. ऐसे में जब बात गर्मी की आती है तो लोगों के जेहन में एक सवाल अक्सर कौंधता है कि आखिर धरती पर गर्मी का रिकॉर्ड क्या रहा है? सबसे ज्यादा गर्मी कहां पड़ती है और अधिकतम तापमान क्या हो सकता है? 

इन सवालों का जवाब ढूंढते हुए 113 साल पुरानी एक कहानी सामने आ जाती है, जब दुनिया के किसी कोने में सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया था. कहा जाता है कि उस वक्त वहां आसमान में उड़ती चिड़ियां भी मर जा रहे थे. यह जगह है अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली.  

Advertisement

यह भी पढ़ें: UK में 40 के पारे में सड़कें क्यों पिघल रही हैं, यहां तो गर्मी में ऐसा नहीं होता!

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ), जो प्रमुख मौसम संबंधी रिकॉर्ड का वैश्विक ब्यौरा रखता है. उसके मुताबिक,  अब तक  डेथ वैली में ही  दुनिया का सबसे ज्यादा एयर टेंप्रेचर रिकॉर्ड किया गया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, 10 जुलाई 1913 को कैलिफोर्निया की डेथ वैली के फर्नेस क्रीक में 56.7 डिग्री सेल्सियस यानी 134.1 फारनहाइट तापमान दर्ज किया गया था.यह आज भी धरती पर दर्ज किया गया सबसे उच्चतम आधिकारिक तापमान माना जाता है. 

वहां आसपास रहने वाले लोगों के दावे के मुताबिक, उस समय ऐसा गर्मी पड़ी थी कि आसमान में उड़ने वाले पक्षी भी उड़ते वक्त मर जा रहे थे. हालांकि, डेथ वेली में रिकॉर्ड तापमान को लेकर कुछ दशकों तक विवाद भी होता रहा. क्योंकि, कुछ एक्सपर्ट का दावा था कि 13 सितंबर 1922 को लीबिया के अल अजीजिया में 58 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था. 

यह भी पढ़ें: भारत में क्यों आयात होते हैं कटे-फटे टायर... यहां आकर उनका क्या होता है?

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम इतिहासकार क्रिस्टोफर बर्ट ने लीबिया के दावे पर  संशय जताते हुए इसे भ्रामक माना है. क्योंकि यह तापमान आसपास के स्टेशनों के तापमान से मेल नहीं खाता था और तब थर्मामीटर की बनावट ऐसी थी कि तापमान को गलत पढ़ना आसान था.

Advertisement

बर्ट और उनके सहयोगियों के प्रयासों के परिणामस्वरूप 2012 में डब्ल्यूएमओ द्वारा अल अजीजिया के रिकॉर्ड को पलट दिया गया, जिसकी कहानी वेदर अंडरग्राउंड की फिल्म 'डेड हीट' में दिखाई गई है. बर्ट और हेरेरा ने 1910 और 1930 के दशक के डेथ वैली और केबिली के तापमान मापों में भी इसी तरह की कमियों को उजागर किया है.

डेथ वैली पहले से ही एक दुर्गम इलाका है, जहां भीषण गर्मी और सूखा पड़ता है और बहुत कम लोग एक-दो दिन से ज़्यादा समय बिता पाते हैं. गर्म होती धरती से हमारे जीवनकाल में डेथ वैली जैसी और जगहें बनने की संभावना नहीं है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement