scorecardresearch
 

सोलर पैनल छोड़ छत पर ही लग रहीं बिजली बनाने वाली टाइल्स, सोलर रूफटॉप की ये तकनीक है बेहद खास

सोलर रूफ टाइल्स छत को बिजली बनाने वाला सिस्टम बना सकती हैं. फिर भी इनका इस्तेमाल सीमित है. जानिए सामान्य सोलर पैनल के मुकाबले इनकी कीमत, बिजली बनाने की क्षमता और मरम्मत से जुड़ी चुनौतियां.

Advertisement
X
सोलर रूफ टाइल्स को लेकर दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने भी कोशिश की है. ( Photo: AI)
सोलर रूफ टाइल्स को लेकर दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने भी कोशिश की है. ( Photo: AI)

आजकल घरों की छत पर सोलर पैनल लगाना आम होता जा रहा है. इनकी मदद से धूप से बिजली बनाई जा सकती है और बिजली के बिल में बचत भी होती है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी छत के बारे में सोचा है, जिसमें अलग से सोलर पैनल लगाने की जरूरत ही न पड़े? छत पर लगी टाइल्स ही बिजली बनाने लगें. ऐसी तकनीक मौजूद है, जिसे सोलर रूफ टाइल्स कहा जाता है. ये देखने में सामान्य छत की टाइल्स जैसी हो सकती हैं, लेकिन इनमें सूरज की रोशनी से बिजली बनाने वाली तकनीक लगी होती है. इसके बावजूद ज्यादातर घरों में इनका इस्तेमाल नहीं दिखता. आखिर इसकी वजह क्या है?

क्या होती हैं सोलर रूफ टाइल्स?
सामान्य सोलर पैनल छत के ऊपर अलग से लगाए जाते हैं. वहीं, सोलर रूफ टाइल्स को छत बनाने वाले सामान में ही शामिल किया जाता है. इन टाइल्स के अंदर ऐसे सेल होते हैं, जो सूरज की रोशनी को बिजली में बदलते हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि घर की छत का लुक भी बना रहता है और बिजली भी पैदा होती है. खासकर उन लोगों के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है, जिन्हें छत पर बड़े-बड़े सोलर पैनल लगाना पसंद नहीं है. पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों में भी इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, जहां इमारत के बाहरी लुक में बदलाव करने पर पाबंदियां होती हैं.

1. सबसे बड़ी परेशानी है ज्यादा कीमत
सोलर रूफ टाइल्स के लोकप्रिय नहीं होने की सबसे बड़ी वजह इनकी कीमत है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर टाइल्स वाली छत बनवाने का खर्च सामान्य छत पर सोलर पैनल लगवाने के मुकाबले करीब दोगुना तक हो सकता है. इसमें मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है. इसकी एक वजह यह भी है कि हर घर की छत का आकार और डिजाइन अलग होता है. इसलिए टाइल्स को लगाने से पहले उनकी डिजाइन और फिटिंग पर अलग से काम करना पड़ सकता है. इसके अलावा छत बनाने वाले कारीगर, सोलर इंस्टॉलर और इलेक्ट्रिशियन की मदद भी लेनी पड़ती है. यानी सामान्य सोलर पैनल लगाने के मुकाबले इस काम में ज्यादा समय, मेहनत और पैसे लग सकते हैं.

Advertisement

2. बिजली बनाने की क्षमता भी कम
सोलर टाइल्स दिखने में आकर्षक जरूर होती हैं, लेकिन बिजली बनाने के मामले में ये सामान्य सोलर पैनल से पीछे रह सकती हैं. इसकी एक वजह इनका छोटा आकार है. इसके अलावा, ये छत के काफी करीब लगी होती हैं, जिससे इनके आसपास हवा आने-जाने की जगह कम मिलती है. गर्मी बढ़ने पर सोलर सेल की बिजली बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. रंगीन सोलर टाइल्स में भी परेशानी हो सकती है. आमतौर पर गहरे रंग की सोलर सतह सूरज की रोशनी को बेहतर तरीके से सोखती है. ऐसे में रंगीन टाइल्स की क्षमता और कम हो सकती है. इसका मतलब है कि जितनी बिजली सामान्य सोलर पैनल से बन सकती है, उतनी बिजली बनाने के लिए कई बार सोलर टाइल्स को ज्यादा जगह पर लगाना पड़ सकता है.

3. खराब होने पर मरम्मत आसान नहीं
सामान्य सोलर पैनल में खराबी आने पर कई बार यह पता लगाना आसान होता है कि किस पैनल में समस्या है. लेकिन सोलर टाइल्स में खराबी का पता लगाना और उसे ठीक करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है. अगर छत के बीच में लगी किसी टाइल को निकालना हो, तो उसके आसपास की टाइल्स तक पहुंचना पड़ सकता है. उन पर चलने से अंदर की छोटी-छोटी दरारें पड़ने का खतरा रहता है. ये दरारें आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती हैं. इसी वजह से सोलर टाइल्स की मरम्मत में ज्यादा समय और पैसा लग सकता है. घर बनवाते समय केवल शुरुआती कीमत ही नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले रखरखाव का खर्च भी ध्यान में रखना जरूरी है.

Advertisement

4. टेस्ला जैसी कंपनी को भी क्यों पीछे हटना पड़ा?
सोलर रूफ टाइल्स को लेकर दुनिया की कई बड़ी कंपनियों ने भी कोशिश की है. इनमें एलन मस्क की कंपनी टेस्ला भी शामिल है. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में टेस्ला ने अपनी वेबसाइट से सोलर रूफ का विकल्प हटा दिया. इसके पीछे कम बिक्री और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को लेकर चल रहा कानूनी विवाद बताया गया. इससे साफ है कि सिर्फ नई तकनीक और खूबसूरत डिजाइन से कोई प्रोडक्ट सफल नहीं हो जाता. उसकी कीमत कितनी है, वह कितनी बिजली बनाता है और उसे लगवाने में कितनी परेशानी होती है, ये बातें भी बहुत मायने रखती हैं.

क्या भविष्य में सोलर टाइल्स सस्ती हो सकती हैं?
सोलर टाइल्स की तकनीक पर अभी भी काम हो रहा है. स्विट्जरलैंड की कंपनी फ्रीसन (Freesuns) जैसी कंपनियां इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं. एक तकनीक, जिसे मैट्रिक्स शिंगलिंग कहा जाता है, इसमें सोलर सेल को पतली पट्टियों में काटकर एक-दूसरे के ऊपर टाइल्स की तरह लगाया जाता है. इन्हें जोड़ने का तरीका ऐसा होता है कि किसी हिस्से पर छाया पड़ने से बिजली का प्रवाह उतना प्रभावित न हो, जितना कुछ सामान्य सोलर सेल में हो सकता है.

Advertisement

इसके अलावा, डिजाइन बनाने की प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर की मदद से आसान करने पर भी काम हो रहा है. इससे हर छत के हिसाब से टाइल्स तैयार करने में लगने वाला समय और खर्च घटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, यह तकनीक कितनी सस्ती और आम होगी, यह आगे होने वाले विकास पर निर्भर करेगा.

फिलहाल कौन-सा विकल्प बेहतर है?
अगर आपका मकसद कम खर्च में ज्यादा बिजली बनाना है, तो सामान्य सोलर पैनल फिलहाल ज्यादा अच्छे विकल्प हो सकते हैं. लेकिन अगर आप नया घर बनवा रहे हैं, छत बदलने वाले हैं और चाहते हैं कि सोलर सिस्टम छत के डिजाइन में ही शामिल हो, तो सोलर टाइल्स पर विचार किया जा सकता है. कुल मिलाकर, सोलर टाइल्स की सबसे बड़ी चुनौती बिजली बनाना नहीं, बल्कि कम कीमत में ज्यादा बिजली बनाना और उनकी मरम्मत को आसान करना है. जब तक इन समस्याओं का बेहतर समाधान नहीं मिलता, तब तक सामान्य सोलर पैनल के मुकाबले सोलर टाइल्स का इस्तेमाल सीमित रह सकता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement