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Psychological Facts: हर बात पर दूसरों की गलतियां निकालने वाले लोग कैसे होते हैं? जानिए साइकोलॉजी क्या कहती है

अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो हर छोटी-छोटी गलती पर आपको टोक देता है, तो जरूरी नहीं कि उसका मकसद आपको नीचा दिखाना हो. साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. चलिए जानते हैं.

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एक्सपर्ट का कहना है कि हर गलती सुधारना जरूरी नहीं होता. ( Photo:  ITG)
एक्सपर्ट का कहना है कि हर गलती सुधारना जरूरी नहीं होता. ( Photo: ITG)

क्या आपके आसपास भी कोई ऐसा इंसान है जो हर छोटी-छोटी बात पर आपको टोक देता है? आपने कोई शब्द गलत बोल दिया, किसी तारीख में गलती हो गई या कोई छोटी सी जानकारी गलत बता दी, तो वह तुरंत बीच में बोल पड़ता है- नहीं, ऐसा नहीं... सही बात ये है. ऐसे लोग कई बार दूसरों को परेशान या घमंडी लगते हैं. लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार,  हर बार ऐसा नहीं होता. हर वक्त दूसरों को सुधारने की आदत के पीछे कई अलग-अलग मानसिक और व्यावहारिक कारण हो सकते हैं. यानी जो व्यक्ति आपको बार-बार टोक रहा है, जरूरी नहीं कि उसका मकसद आपको नीचा दिखाना ही हो.

हमेशा सही जानकारी देने की आदत
साइकोलॉजिस्ट वंदना शर्मा कहती हैं कि कुछ लोगों का दिमाग तथ्यों और सही जानकारी पर बहुत ज्यादा ध्यान देता है. अगर उन्हें कोई गलती दिखाई देती है तो वे उसे अनदेखा नहीं कर पाते. उन्हें लगता है कि अगर अभी गलती नहीं सुधारी गई तो आगे गलत जानकारी फैल सकती है. इसलिए वे तुरंत सामने वाले को सही बात बताने लगते हैं.

साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि कुछ लोग बहुत बारीकी से चीजों को देखते हैं. उनकी नजर छोटी से छोटी गलती पर भी चली जाती है. यही वजह है कि बातचीत के दौरान भी वे शब्दों, तारीखों या तथ्यों में हुई छोटी-सी गलती को तुरंत पकड़ लेते हैं. कई बार यह उनकी आदत बन जाती है.

खुद को सही साबित करने की इच्छा
हर व्यक्ति ऐसा नहीं होता, लेकिन कुछ लोग दूसरों को सुधारकर खुद को ज्यादा जानकार दिखाना चाहते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वे सही जानकारी देंगे तो लोग उन्हें बुद्धिमान और समझदार मानेंगे. ऐसे लोग अक्सर बहस में भी अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं.

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बचपन की परवरिश भी हो सकती है वजह
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि कई आदतें बचपन से बनती हैं. अगर किसी व्यक्ति को बचपन से हर काम बिल्कुल सही करने की सीख मिली हो या गलतियों पर ज्यादा ध्यान दिया गया हो, तो बड़े होने पर भी वह दूसरों की गलतियां तुरंत सुधारने लगता है. यह उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन सकता है.

हर बार किसी की गलती सुधारने का मतलब उसे शर्मिंदा करना नहीं होता. कई लोग सच में सामने वाले की मदद करना चाहते हैं ताकि वह भविष्य में वही गलती दोबारा न करे. हालांकि, अगर सुधारने का तरीका गलत हो तो सामने वाले को बुरा लग सकता है.

बातचीत का तरीका भी मायने रखता है
एक ही बात दो अलग-अलग तरीकों से कही जा सकती है. अगर कोई व्यक्ति सम्मान के साथ कहे- शायद इसमें छोटी-सी गलती है, तो सामने वाला आसानी से बात मान सकता है. लेकिन अगर वही बात बार-बार या सबके सामने कही जाए, तो लोगों को अपमान महसूस हो सकता है. इसलिए सिर्फ सही होना ही काफी नहीं है, सही तरीका भी जरूरी है.

क्या हमेशा दूसरों को सुधारना सही है?
एक्सपर्ट का कहना है कि हर गलती सुधारना जरूरी नहीं होता. अगर गलती छोटी है और उससे किसी को नुकसान नहीं हो रहा, तो कई बार उसे नजरअंदाज करना बेहतर होता है. लेकिन अगर गलत जानकारी से नुकसान हो सकता है, तब सही जानकारी देना जरूरी है. फर्क सिर्फ इतना है कि बात सम्मान और समझदारी से कही जाए.

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अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति हर समय आपकी गलतियां सुधारता रहता है, तो तुरंत यह मत मानिए कि वह आपको परेशान करना चाहता है. हो सकता है कि वह सही जानकारी देने का आदी हो, छोटी-छोटी बातों पर ज्यादा ध्यान देता हो या उसकी परवरिश और सोच उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करती हो. वहीं अगर आपको खुद भी हर वक्त लोगों को सुधारने की आदत है, तो कभी-कभी यह भी सोचिए कि क्या सामने वाले के लिए वह गलती वास्तव में इतनी बड़ी थी या नहीं. कई बार रिश्तों में सही होने से ज्यादा जरूरी होता है, सामने वाले की भावनाओं का ख्याल रखना.

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