सोशल मीडिया पर कई सालों से प्लास्टिक की पत्तागोभी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में दिखता है कि एक शख्स पानी या किसी कैमिकल में कुछ कैमिकल डालता है और उससे पत्तागोभी बना लेता है. इसके बाद से वीडियो का वायरल कर ये कहा जाता है कि बाजार में अब प्लास्टिक से बनने वाली पत्तागोभी बिक रही हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं अक्सर वायरल होने वाले इस वीडियो की कहानी कुछ और है. ये वीडियो एक आर्टिस्ट का है, जो इस तरह के नकली सामान बनाते हैं.
दरअसल, यह वीडियो किसी मिलावटी सब्जी को बनाने का नहीं, बल्कि खाने की चीजों के हूबहू दिखने वाले मॉडल तैयार करने की कला का है. इन मॉडलों का इस्तेमाल जापान में रेस्तरां के बाहर और मेन्यू डिस्प्ले में किया जाता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर प्लास्टिक वाली पत्तागोभी की क्या कहानी है.
कहां का है पत्तागोभी बनाने वाला वीडियो?
इस वीडियो की पड़ताल अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी AFP समेत कई फैक्ट-चेक संस्थाएं कर चुकी हैं. एक बार साल 2014 में ये वीडयो शेयर किया गया था, जिसमें इसमें जापान के कारीगर पत्तागोभी और टेंपुरा जैसे खाद्य पदार्थों के नमूने बनाते दिखते हैं. दरअसल, जापान में फूड-रेप्लिका बनाने वाले कारीगर होते हैं, जो इस तरह के खाने के आइटम बनाते हैं.
साल 2019 में भी ऐसा अपलोड किया गया था और उसका टाइटल 'A Lesson in Making Lettuce' था. इसे जापान के गिफू प्रांत के गूजो हाचिमान इलाके में शूट किया गया था. यहां कारीगर बच्चों को दिखाने के लिए सलाद पत्ता यानी लेट्यूस के नमूने बनाने का अभ्यास कर रहे थे. सोशल मीडिया पर बाद में इन वीडियो को प्लास्टिक की पत्तागोभी बनाने का तरीका बताकर शेयर किया जाने लगा.
आखिर क्या है खाने की चीजों के मॉडल बनाने की कला?
जापान में खाने की चीजों के ऐसे मॉडल बनाने की एक खास परंपरा है. इन्हें जापानी भाषा में 'शोकुहिन सैंपल' कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो ये खाने-पीने की चीजों की ऐसी प्रतिकृतियां होती हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगती हैं, लेकिन इन्हें खाया नहीं जा सकता. जापान के रेस्तरां में इनका इस्तेमाल ग्राहकों को मेन्यू समझाने के लिए किया जाता है. मसलन, अगर किसी रेस्तरां में रेमन, टेंपुरा, सब्जियों या किसी खास डिश की तस्वीर देखने के बजाय उसका असली जैसा मॉडल सामने रखा हो, तो ग्राहक आसानी से समझ सकता है कि उसे क्या परोसा जाएगा.
इन मॉडलों को बनाने में प्लास्टिक, मोम और दूसरे उपयुक्त पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है. बाद में इन्हें रंग और बारीकियों की मदद से असली खाने जैसा रूप दिया जाता है. पत्तागोभी के मामले में भी अलग-अलग पत्तियों जैसी परतें बनाकर उन्हें इस तरह जोड़ा जाता है कि पूरा आकार असली गोभी जैसा दिखाई दे. यह काम केवल किसी चीज का आकार बना देने तक सीमित नहीं है. कारीगरों को उसकी बनावट, रंग, चमक और छोटे-छोटे अंतर का ध्यान रखना पड़ता है. यही वजह है कि कई बार कैमरे में दिखने वाली ऐसी प्रतिकृतियों को असली खाने से अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है.