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मैटरनिटी लीव में क्या किसी को नौकरी निकाल सकते हैं? ये है नियम

मैटरनिटी लीव लेने वाली महिला कर्मचारी को सिर्फ प्रेग्नेंसी या मैटरनिटी लीव लेने की वजह से नौकरी से निकालना सामान्य तौर पर कानून के खिलाफ है. मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 की धारा 12 में महिला कर्मचारियों को इस तरह की सुरक्षा दी गई है. पात्र महिलाओं को सामान्य परिस्थितियों में 26 हफ्ते तक की मैटरनिटी लीव मिल सकती है.

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मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट में पात्र महिला कर्मचारियों के लिए सामान्य तौर पर 26 हफ्ते तक की मातृत्व छुट्टी का प्रावधान है. ( Photo: ITG)
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट में पात्र महिला कर्मचारियों के लिए सामान्य तौर पर 26 हफ्ते तक की मातृत्व छुट्टी का प्रावधान है. ( Photo: ITG)

नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी और बच्चे के जन्म का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान उन्हें आराम, इलाज और बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी की जरूरत होती है. इसी जरूरत को देखते हुए भारत में मैटरनिटी लीव यानी मातृत्व अवकाश का प्रावधान किया गया है. लेकिन कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि अगर उन्होंने मैटरनिटी लीव ली तो क्या कंपनी उन्हें नौकरी से निकाल सकती है? सिर्फ मैटरनिटी लीव लेने या प्रेग्नेंसी की वजह से महिला को नौकरी से निकालना कानून के खिलाफ है. मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 की धारा 12 महिला कर्मचारी को इस तरह की नौकरी से सुरक्षा देती है. 

मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट की धारा 12 के मुताबिक, अगर कोई महिला कानून के तहत मिलने वाली मैटरनिटी लीव पर है, तो सिर्फ उसकी इस छुट्टी की वजह से उसे नौकरी से निकाला नहीं जा सकता. इतना ही नहीं, नियोक्ता उसकी सेवा की शर्तों को भी उसके नुकसान के लिए नहीं बदल सकता. यानी अगर किसी महिला ने नियमों के मुताबिक मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन किया है और कंपनी उसे सिर्फ इसलिए निकाल देती है कि वह कुछ समय काम नहीं कर रही है, तो यह कार्रवाई चुनौती दी जा सकती है.

कितनी मैटरनिटी लीव मिलती है?
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट में पात्र महिला कर्मचारियों के लिए सामान्य तौर पर 26 हफ्ते तक की मातृत्व छुट्टी का प्रावधान है. इसके लिए कानून में कुछ पात्रता शर्तें भी तय हैं. मसलन, महिला ने अपेक्षित डिलीवरी की तारीख से पहले के 12 महीनों में कम से कम 80 दिन उस प्रतिष्ठान में काम किया हो. हालांकि, हर कर्मचारी की स्थिति एक जैसी नहीं होती. इसलिए छुट्टी की पात्रता और अवधि नौकरी की स्थिति, बच्चों की संख्या और कानून में लागू विशेष परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती है. सिर्फ प्रेग्नेंसी की वजह से महिला को नौकरी से निकालना भी सामान्य तौर पर कानूनी सुरक्षा के दायरे में आता है. कानून में यह भी कहा गया है कि महिला को नौकरी से हटाने का फैसला उसकी पात्रता वाली मैटरनिटी बेनिफिट या मेडिकल बोनस को अपने आप खत्म नहीं करता. 

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हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी महिला को किसी भी परिस्थिति में नौकरी से निकाला ही नहीं जा सकता. अगर कर्मचारी ने गंभीर गलत आचरण (Gross misconduct) किया है और कानून के मुताबिक उचित प्रक्रिया अपनाई गई है, तो अलग स्थिति बन सकती है. 

कंपनी कहे कि नौकरी खत्म हो गई, तब क्या करें?
अगर मैटरनिटी लीव लेने के बाद कंपनी नौकरी जानें की बात कहती है, तो सबसे पहले घबराने के बजाय सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें. इसमें ऑफर लेटर, ऑफर लेटर, सैलरी स्लिप, मैटरनिटी लीव का आवेदन, कंपनी के ईमेल, व्हाट्सऐप या अन्य मैसेज और टर्मिनेशन लेटर शामिल हो सकते हैं. कंपनी से नौकरी जाने का कारण लिखित में मांगना भी महत्वपूर्ण है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कार्रवाई वास्तव में किस वजह से की गई और आगे शिकायत या कानूनी कार्रवाई में रिकॉर्ड के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

नौकरी से निकाल दिया गया तो कहां शिकायत करें?
अगर किसी महिला को लगता है कि उसे मैटरनिटी लीव या प्रेग्नेंसी की वजह से गलत तरीके से नौकरी से हटाया गया है, तो वह संबंधित लेबर अथॉरिटी या सक्षम प्राधिकारी के सामने शिकायत कर सकती है. कानून में ऐसी महिला को कुछ मामलों में आदेश के खिलाफ 60 दिनों के भीतर अपील करने का प्रावधान भी है. मामले की प्रकृति के अनुसार महिला लेबर कोर्ट या अन्य उचित कानूनी मंच का सहारा भी ले सकती है. कुछ परिस्थितियों में नौकरी पर वापस लिए जाने, बकाया वेतन या अन्य राहत की मांग की जा सकती है. हालांकि, इसका फैसला मामले के तथ्यों और लागू कानून के आधार पर होता है.

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क्या कॉन्ट्रैक्ट या अस्थायी कर्मचारी भी सुरक्षित हैं?
मैटरनिटी बेनिफिट से जुड़े अधिकार केवल इस बात पर निर्भर नहीं करते कि कर्मचारी को कंपनी ने परमानेंट कर्मचारी कहा है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने Municipal Corporation of Delhi vs Female Workers मामले में मैटरनिटी लीव के महत्व को स्पष्ट किया था और अस्थायी तथा दिहाड़ी महिला कर्मचारियों के अधिकारों को भी मान्यता दी थी.  इसलिए अगर कोई महिला कॉन्ट्रैक्ट, अस्थायी या किसी अन्य व्यवस्था के तहत काम कर रही है, तो उसे अपनी स्थिति के अनुसार कानून में मिलने वाले अधिकारों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.

मैटरनिटी लीव महिला कर्मचारी की कोई गलती या कंपनी पर एहसान नहीं है. पात्र होने पर यह कानून के तहत मिलने वाला अधिकार है. इसलिए केवल गर्भवती होने, मैटरनिटी लीव मांगने या कानून के तहत छुट्टी पर रहने की वजह से नौकरी खत्म करना सामान्य तौर पर कानूनी सुरक्षा के खिलाफ है.अगर आपके साथ ऐसी स्थिति आती है, तो बिना सोचे-समझे इस्तीफा देने के बजाय पहले अपने दस्तावेज सुरक्षित करें, कंपनी से लिखित जवाब मांगें और जरूरत पड़ने पर लेबर अथॉरिटी या किसी योग्य वकील से सलाह लें. सही रिकॉर्ड और समय पर कार्रवाई आपके अधिकारों की रक्षा करने में काफी मदद कर सकती है.

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नोट: यह सामान्य कानूनी जानकारी है. किसी खास नौकरी या टर्मिनेशन के मामले में लागू कानून और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, इसलिए व्यक्तिगत मामले में योग्य कानूनी सलाह लेना बेहतर है.

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