बारिश कम हो रही है, फिर भी देश के कई हिस्सों में बाढ़ और जलभराव की तस्वीरें क्यों सामने आ रही हैं? सुनने में यह सवाल थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन मानसून का मौजूदा पैटर्न इसी विरोधाभास की तरफ इशारा कर रहा है. एक तरफ पूरे देश की औसत बारिश सामान्य से नीचे है, वहीं दूसरी तरफ कुछ इलाकों में थोड़े समय के भीतर इतनी तेज बारिश हो रही है कि नदियां उफान पर आ जाती हैं और शहरों में पानी भर जाता है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 2 सितंबर 2026 तक देश में कुल बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही. इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों में भारी और बेहद भारी बारिश के दौर देखे गए हैं.
तो आखिर कम बारिश के बीच बाढ़ की स्थिति कैसे बन रही है? इसका जवाब सिर्फ बारिश की कुल मात्रा में नहीं, बल्कि बारिश कब, कितनी तेजी से और कहां हो रही है, इसमें छिपा है.
कुल बारिश और बारिश का तरीका, दोनों अलग चीजें
मान लीजिए किसी इलाके में पूरे महीने 100 मिलीमीटर बारिश होनी है. अगर यह बारिश पूरे महीने में थोड़ी-थोड़ी करके होती रहे तो जमीन और नदियों को पानी संभालने का ज्यादा समय मिल सकता है.लेकिन यही 100 मिलीमीटर पानी अगर कुछ घंटों या दो-तीन दिनों में बहुत तेज बारिश के रूप में गिर जाए, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है.
इतनी तेज बारिश का बड़ा हिस्सा जमीन के अंदर जाने के बजाय सतह पर बहने लगता है. यही पानी नालों, नदियों और निचले इलाकों में तेजी से पहुंचता है और बाढ़ या फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ जाता है.यानी कम कुल बारिश का मतलब यह नहीं है कि हर दिन बारिश कम और सामान्य तरीके से ही होगी.
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कुछ घंटों की बारिश बन सकती है बड़ी मुसीबत
बारिश के आंकड़े आम तौर पर किसी दिन, महीने या पूरे मौसम की कुल बारिश बताते हैं. लेकिन बाढ़ के लिए सिर्फ कुल आंकड़ा मायने नहीं रखता.अगर किसी जगह कुछ ही घंटों में बहुत ज्यादा पानी गिर जाए तो वहां की ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता जवाब दे सकती है. नदियों और छोटी जलधाराओं में पानी तेजी से बढ़ सकता है.यही वजह है कि किसी राज्य या पूरे देश की औसत बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद किसी खास जिले में बाढ़ आ सकती है.
हालिया मौसम रिपोर्टों में भी भारत में कम औसत बारिश के साथ ज्यादा एक्सट्रीम रेनफॉल की घटनाओं के बढ़ने की ओर ध्यान दिलाया गया है.
शहरों में खतरा और ज्यादा क्यों?
शहरी इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है.सड़कें, कंक्रीट, पार्किंग और इमारतें जमीन के बड़े हिस्से को ढक देती हैं. ऐसे में बारिश का पानी आसानी से जमीन के अंदर नहीं जा पाता.अगर थोड़े समय में बहुत ज्यादा बारिश हो जाए तो पानी को बाहर निकालने के लिए मौजूद नालियां और ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त नहीं पड़ते. नतीजा- सड़कें और निचले इलाके पानी में डूबने लगते हैं.यानी एक ही बारिश गांव और शहर में अलग-अलग असर डाल सकती है.
फिर अल नीनो का इसमें क्या रोल है?
इस साल भारत के मानसून पर अल नीनो का असर भी चर्चा में है. अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है, जो दुनिया के कई हिस्सों के मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.
भारत के लिए अल नीनो का संबंध अक्सर कमजोर मानसून से जोड़ा जाता है. इस साल भी मौसम एजेंसियों ने मानसून के कमजोर रहने की आशंका जताई है. आईएमडी ने सितंबर में भी देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है.
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. कम औसत बारिश का मतलब यह नहीं कि हर जगह बारिश कम ही होगी.
मौसम का पैटर्न ज्यादा अनियमित हो सकता है. लंबे समय तक सूखा जैसा दौर रहने के बाद अचानक कुछ इलाकों में बहुत तेज बारिश हो सकती है.
क्लाइमेट चेंज भी बदल रहा है बारिश का तरीका?
वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों के बीच यह भी चर्चा है कि बढ़ता तापमान बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर रहा है.गर्म हवा ज्यादा नमी धारण कर सकती है. जब ऐसी नमी वाली हवा सही मौसम परिस्थितियों में ऊपर उठती है, तो कम समय में भारी बारिश का दौर बन सकता है.
इसी वजह से मौसम में एक तरफ लंबे ड्राई स्पेल और दूसरी तरफ अचानक एक्सट्रीम रेनफॉल जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं. हालांकि किसी एक बारिश की घटना को सिर्फ क्लाइमेट चेंज के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.
यही है कम बारिश और बाढ़ का असली कनेक्शन
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए.
बारिश कम है तो इसका मतलब ये बाढ़ नहीं होगी, यह जरूरी नहीं. असल सवाल है बारिश कितनी हुई? कितने समय में हुई? किस इलाके में हुई? जमीन कितना पानी सोख पाई, और ड्रेनज सिस्टम कितना पानी संभाल पाया?
अगर बारिश की कुल मात्रा कम है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा बहुत कम समय में एक ही इलाके में गिर जाता है, तो बाढ़ की स्थिति बन सकती है.यही वजह है कि एक ही मौसम में देश के किसी हिस्से में सूखे जैसी स्थिति और दूसरे हिस्से में बाढ़ जैसी तस्वीर दिखाई दे सकती है.