हर महीने बिजली का बिल आते ही ज्यादातर लोग सिर्फ फाइनल अमाउंट देखते हैं और बिल जमा कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी यह चेक किया है कि आपके बिल में मीटर की रीडिंग सही है या नहीं? आपका कनेक्शन किस कैटेगरी में है, कितना लोड दर्ज है और मीटर की स्थिति क्या दिखाई गई है? इन छोटी-छोटी चीजों को चेक करके आप आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपका बिजली का बिल सही है या नहीं. खासकर कई बार ऐसा होता है कि घर पर मिला बिल कम अमाउंट होता है, लेकिन जब कस्टमर ऑनलाइन बिल चेक करता है तो वहां ज्यादा अमाउंट दिखाई देता है. ऐसे में दोनों बिलों में अंतर क्यों आता है, यह समझना भी जरूरी है.
सबसे पहले बिल में ये चीजें देखें
बिजली के बिल में सबसे ऊपर बिजली वितरण कंपनी का नाम और बिल से जुड़ी जानकारी होती है. इसमें बिल आईडी और अकाउंट आईडी अलग-अलग होती हैं. हर बार नया बिल बनने पर बिल आईडी बदल सकती है, जबकि आपका अकाउंट नंबर आमतौर पर वही रहता है. इसके बाद बिल जारी होने की तारीख, बिलिंग का महीना और वर्ष दिया होता है. यहां बिल बेसिस भी लिखा रहता है. अगर इसमें मीटर की स्थिति सामान्य है तो बिल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर तैयार किया गया हो सकता है. इसके बाद उपभोक्ता का नाम, पता, मोबाइल नंबर, अकाउंट नंबर और कनेक्शन से जुड़ी जानकारी दी जाती है. अगर आपका मोबाइल नंबर या ईमेल बिल में अपडेट नहीं है तो संबंधित बिजली कार्यालय में जाकर इसे अपडेट करवाना उपयोगी है.
अपना लोड और कनेक्शन की कैटेगरी जरूर चेक करें
बिल में आपके कनेक्शन का लोड भी दर्ज होता है. इसे देखकर आप यह पता कर सकते हैं कि आपके कनेक्शन पर कितना लोड स्वीकृत है. इसके अलावा बिल में कनेक्शन की कैटेगरी भी लिखी होती है. घरेलू कनेक्शन के लिए आमतौर पर डोमेस्टिक कैटेगरी होती है, जबकि दुकानों और अन्य गैर-घरेलू कनेक्शनों के लिए अलग कैटेगरी हो सकती है. अलग-अलग कैटेगरी में बिजली की दरें अलग हो सकती हैं.
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मीटर की स्थिति सबसे जरूरी
बिजली का बिल चेक करते समय मीटर स्टेटस जरूर देखें. इसमें यह जानकारी मिलती है कि मीटर सामान्य स्थिति में है या उसमें कोई समस्या दर्ज की गई है. इसके बाद बिल में पिछली और वर्तमान मीटर रीडिंग दी होती है. इन दोनों रीडिंग के अंतर से यह पता चलता है कि बिलिंग अवधि में कितनी यूनिट बिजली खर्च हुई. आप चाहें तो अपने घर के मीटर पर दिखाई दे रही रीडिंग को बिल में लिखी वर्तमान रीडिंग से मिला सकते हैं. अगर दोनों में बड़ा अंतर है तो तुरंत बिजली विभाग से शिकायत करना बेहतर है.
गलत रीडिंग से बढ़ सकता है बिल
कई बार मीटर रीडर मौके पर जाकर रीडिंग लेने के बजाय गलत रीडिंग दर्ज कर देता है. ऐसी स्थिति में वास्तविक खपत से ज्यादा या कम यूनिट का बिल बन सकता है. इसलिए बिल आने के बाद सिर्फ अमाउंट न देखें. मीटर की वर्तमान रीडिंग और बिल में दर्ज रीडिंग जरूर मिलाएं. अगर कोई गड़बड़ी दिखाई देती है तो समय रहते शिकायत करें. कुछ उपभोक्ताओं की शिकायत होती है कि घर पर दिए गए बिल में रकम कम लिखी होती है, लेकिन ऑनलाइन बिल चेक करने या बिजली कार्यालय में भुगतान करने पर ज्यादा राशि दिखाई देती है.
ऐसा अलग-अलग चार्ज, बकाया राशि या ACD( Advance Consumption Deposit) जैसे शुल्क के कारण हो सकता है. इसलिए अगर दोनों रकम में अंतर दिखाई दे तो सीधे विभाग से इसकी जानकारी लेना सबसे सही तरीका है.
बिल में ड्यू डेट भी देखें
बिल में भुगतान की आखिरी तारीख यानी ड्यू डेट भी दी होती है. कोशिश करें कि बिल का भुगतान तय तारीख तक कर दें. देरी होने पर लागू नियमों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क या सरचार्ज लग सकता है.बिल में यह भी बताया जाता है कि किसी शिकायत की स्थिति में बिजली विभाग से कैसे संपर्क किया जा सकता है. उपभोक्ता अपने क्षेत्र के संबंधित कार्यालय या उपलब्ध शिकायत माध्यम से बिल से जुड़ी समस्या दर्ज करा सकता है.
ऐसे करें अपने बिल की जांच
बिल आने के बाद उसे जमा करने से पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच जरूर कर लें. सबसे पहले अपना अकाउंट नंबर और कनेक्शन की कैटेगरी सही है या नहीं, यह देखें. इसके बाद स्वीकृत लोड (Sanctioned Load), मीटर का स्टेटस, पिछली और वर्तमान मीटर रीडिंग में अंतर और इस महीने कितनी यूनिट बिजली खर्च हुई है, इसकी जानकारी चेक करें. साथ ही पुराने बिल का कोई बकाया है या नहीं, इस महीने कितनी रकम जमा करनी है और बिल की ड्यू डेट क्या है, यह भी जरूर देखें. अगर आप ऑनलाइन बिल देख रहे हैं तो वहां दिखाया जा रहे अमांउंट को घर पर मिले बिल से मिलाकर जांच लें. अगर इनमें से किसी भी जानकारी में कोई गड़बड़ी नजर आती है, तो बिल जमा करने से पहले बिजली विभाग से इसकी जानकारी लेना बेहतर होगा.