6 अगस्त 1945 को अमेरिका परमाणु हथियारों का प्रयोग करने वाला पहला और एकमात्र राष्ट्र बन गया. जब उसने जापान के हिरोशिमा शहर पर परमाणु बम गिराया. इस विस्फोट के में लगभग 80,000 लोग मारे गए और 35,000 घायल हो गए. रेडिएशन के प्रभावों से एक साल में कम से कम और 60,000 लोगों की मौत हो गई. जापान पर परमाणु बम गिराए जाने के साथ ही दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया. वहीं कई इतिहासकारों का तर्क है कि इसने शीत युद्ध को भी जन्म दिया था.
1940 से ही अमेरिका परमाणु बम बनाने पर काम कर रहा था. क्योंकि उसे चेतावनी मिल गई थी कि नाज़ी जर्मनी पहले से ही परमाणु हथियारों पर शोध कर रहा है. अमेरिका ने जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में परमाणु बम का पहला सफल परीक्षण किया. उस वक्त तक जर्मनी हार चुका था.
हालांकि, प्रशांत महासागर में जापान के खिलाफ युद्ध जारी था. राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन को उनके कुछ सलाहकारों ने चेतावनी दी थी कि जापान पर हमला करने की किसी भी कोशिश से अमेरिकी सेना को भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए उन्होंने युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए नए हथियार का इस्तेमाल करने का आदेश दिया.
6 अगस्त 1945 को अमेरिकी बमवर्षक विमान एनोला गे ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पांच टन का बम गिराया. 15,000 टन टीएनटी के बराबर शक्ति वाले इस विस्फोट ने शहर के चार वर्ग मील क्षेत्र को खंडहर में तब्दील कर दिया. इसके साथ ही तुरंत 80,000 लोगों की जान ले ली. अगले हफ्तों में हजारों और लोग घावों और रेडिएशन से मर गए. तीन दिन बाद, नागासाकी शहर पर एक और बम गिराया गया. इसमें लगभग 40,000 और लोग मारे गए. कुछ दिनों बाद, जापान ने आत्मसमर्पण की घोषणा कर दी.
जापान पर दो परमाणु बम गिराए जाने के बाद के वर्षों में, कई इतिहासकारों ने परमाणु हथियार के इस्तेमाल के दोहरे मकसद की तरफ इशारा किया. पहला उद्देश्य, जापान के साथ युद्ध को जल्द खत्म करना और अमेरिकी सैनिकों की जान बचाना था. यह भी सुझाव दिया गया है कि दूसरा उद्देश्य सोवियत संघ को इस नए सामूहिक विनाश के हथियार का प्रदर्शन करना था.
अगस्त 1945 तक सोवियत संघ और अमेरिका के बीच संबंध बिगड़ चुके थे. अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन, रूसी नेता जोसेफ स्टालिन और विंस्टन चर्चिल के बीच पॉट्सडैम सम्मेलन हिरोशिमा पर बमबारी से ठीक चार दिन पहले समाप्त हुआ था. इस सम्मेलन में अमेरिकियों और सोवियत संघ के बीच आरोप-प्रत्यारोप और संदेह का बोलबाला रहा. रूसी सेनाएं पूर्वी यूरोप के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर चुकी थीं.
ट्रूमैन और उनके कई सलाहकारों को उम्मीद थी कि अमेरिका का परमाणु एकाधिकार सोवियत संघ के साथ कूटनीति में लाभ पहुंचा सकता है. इस लिहाज से, जापान पर परमाणु बम गिराना शीत युद्ध की पहली शुरुआत मानी जा सकती है.
यदि अमेरिकी अधिकारियों को सचमुच यह विश्वास था कि वे परमाणु शक्ति पर अपने एकाधिकार का इस्तेमाल कूटनीतिक लाभ के लिए कर सकते हैं, तो उनके पास अपनी योजना को अमल में लाने के लिए बहुत कम समय था. 1949 तक, सोवियत संघ ने भी अपना परमाणु बम विकसित कर लिया था. इस तरह पूरी दुनिया में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो गई थी.