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दिल्ली में जहां बिल्डिंग गिरी, वहां मिनटों में पहुंची ब्लिंकिट एंबुलेंस! इस फ्री सर्विस के बारे में जानते हैं?

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला बिल्डिंग गिरने से बड़ा हादसा हो गया. बताया जा रहा है कि इमारत में छात्र रहते थे और कई लोग मलबे में फंस गए. हादसे के बाद स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे. मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में परेशानी न हो, इसके लिए लोगों ने Blinkit के जरिए ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने की कोशिश की. 

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इस एंबुलेंस सर्विस का इस्तेमाल हॉस्पिटल से मरीज को घर लाने के लिए भी किया जा सकता है. ( Photo: ANI)
इस एंबुलेंस सर्विस का इस्तेमाल हॉस्पिटल से मरीज को घर लाने के लिए भी किया जा सकता है. ( Photo: ANI)

रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. यह बिल्डिंग छात्रों के रहने के लिए पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी. हादसे के बाद कई लोग मलबे में दब गए और मौके पर चीख-पुकार मच गई. कुछ ही सेकंड में जहां लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे, वहीं चारों तरफ धूल, मलबा और मदद की आवाजें सुनाई देने लगीं. स्थानीय लोग बिना किसी की पहचान या रिश्ते की परवाह किए मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए जुट गए. कुछ छात्रों ने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर मदद की गुहार भी लगाई.

इस मुश्किल वक्त में लोगों ने मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ब्लिंकिट से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाए. जिस ऐप से आमतौर पर लोग घर बैठे कुछ ही मिनटों में रोजमर्रा का सामान मंगाते हैं, वही तेज डिलीवरी इस आपात स्थिति में जिंदगी बचाने की उम्मीद बन गई. मलबे के अंदर सांसों के लिए जूझ रहे लोगों के लिए समय पर ब्लिंकइट ने ऑक्सीजन पहुंचाया. दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे के बाद राहत और बचाव की कोशिशों में ब्लिंकिट की एंबुलेंस टीम भी मौके पर पहुंची. कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिसमें ब्लिंकिट के स्टाफ बता रहे हैं कि हादसे की सूचना मिलते ही उनकी टीम को सबसे पहले कॉल आया.

बिल्डिंग हादसे में ब्लिंकइट ने पहुंचाई मदद
ब्लिंकिट एंबुलेंस के स्टाफ ने बताया कि उनकी एंबुलेंस सफदरजंग अस्पताल में तैनात रहती है और कंपनी के ऐप के जरिए ही इमरजेंसी कॉल टीम तक पहुंचती है. सूचना मिलते ही एंबुलेंस को हादसे वाली जगह के लिए रवाना किया गया. ब्लिंकिट का सिस्टम इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद टीम को तुरंत अलर्ट करता है, जिससे जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस को तेजी से मौके पर भेजा जा सके. सत्य निकेतन हादसे मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द मेडिकल मदद की जरूरत थी. हादसे के बीच एंबुलेंस टीम का मौके पर पहुंचना राहत और बचाव अभियान में मददगार साबित हुआ.

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सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ब्लिंकिट स्टाफ ने बताया कि उनकी टीम को सत्य निकेतन हादसे की पहली सूचना करीब 1:40 बजे मिली थी. इसके बाद टीम ने बिना समय गंवाए तुरंत मौके के लिए निकलने की तैयारी की और करीब 1:50 बजे, यानी सिर्फ 10 मिनट के अंदर, उनकी टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. मौके पर पहुंचने के बाद ब्लिंकिट की टीम ने राहत और बचाव कार्य में हर संभव मदद और पूरा सहयोग दिया. हादसे की गंभीरता को देखते हुए टीम ने जरूरतमंद लोगों की मदद करने और बचाव अभियान में सहयोग देने की कोशिश की.

ब्लिंकइट एंबुलेंस कैसे बुक करें?

  • ब्लिंकइट ऐप के होम पेज पर नीचे 'Ambulance' का ऑप्शन दिखाई देने पर उस पर क्लिक करें.
  • इसके बाद 'Request Ambulance' चुनें, अपना पिक-अप एड्रेस कन्फर्म करें और बुकिंग कर दें.
  • रिक्वेस्ट मिलते ही एंबुलेंस आपके लोकेशन पर भेजी जाएगी.
  • हॉस्पिटल का नाम बुकिंग के बाद भी बताया जा सकता है.

ब्लिंकिट एंबुलेंस में क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं?
एंबुलेंस में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन, वाइटल मॉनिटरिंग डिवाइस, AED यानी डिफिब्रिलेटर, सक्शन मशीन, जरूरी दवाइयां और फ्लूइड जैसी सुविधाएं मौजूद होती हैं.

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क्या एंबुलेंस में डॉक्टर भी मौजूद रहता है?
नहीं, एंबुलेंस में डॉक्टर मौजूद नहीं होता. हालांकि, इसमें मौजूद प्रशिक्षित पैरामेडिक को जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी डॉक्टर से फोन या वीडियो के जरिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा मिलती है.

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किन मेडिकल मामलों में ब्लिंकिट एंबुलेंस बुक कर सकते हैं?
इस सर्विस का इस्तेमाल हार्ट अटैक या कार्डियक इमरजेंसी, दौरा पड़ने, रोड एक्सीडेंट और कुछ ओपीडी मामलों में किया जा सकता है.

किन मरीजों के लिए यह एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है?
वेंटिलेटर वाले मरीज, 12 महीने से छोटे बच्चे, डिलीवरी या बच्चे के जन्म से जुड़े केस और मोर्टरी ट्रांसपोर्ट के लिए यह सर्विस उपलब्ध नहीं है.

क्या रोड एक्सीडेंट के मरीज के लिए एंबुलेंस बुक कर सकते हैं?
हां, अगर आपके इलाके में ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस उपलब्ध है, तो कोई भी व्यक्ति रोड एक्सीडेंट के मरीज के लिए एंबुलेंस बुक कर सकता है. एंबुलेंस मरीज को नजदीकी या मरीज के परिवार द्वारा चुने गए हॉस्पिटल तक पहुंचा सकती है.

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यह सर्विस अभी कहां उपलब्ध है?
फिलहाल ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस गुरुग्राम और दिल्ली के कुछ चुनिंदा इलाकों में उपलब्ध है.

एंबुलेंस कितनी देर में पहुंचती है?
अगर ऐप में एंबुलेंस का ऑप्शन दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आपके आसपास एंबुलेंस उपलब्ध है. सामान्य तौर पर यह करीब 10 मिनट में पहुंच सकती है, लेकिन ट्रैफिक और सड़क की स्थिति के कारण समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है. बुकिंग से पहले अनुमानित समय बताया जाता है.

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एंबुलेंस आने तक मरीज के लिए क्या करना होगा?
बुकिंग कन्फर्म होने के बाद पैरामेडिक आपको फोन कर सकता है. वह मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी लेगा और एंबुलेंस पहुंचने तक जरूरी निर्देश देगा. एंबुलेंस का स्टाफ मरीज को उठाने और एंबुलेंस तक पहुंचाने में मदद करता है.

मरीज के साथ कितने लोग जा सकते हैं?
मरीज के साथ दो लोग एंबुलेंस में जा सकते हैं.

मरीज को किन हॉस्पिटल में ले जाया जा सकता है?
गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में उपलब्ध हॉस्पिटल तक मरीज को ले जाया जा सकता है. ऐप में नजदीकी हॉस्पिटल की जानकारी भी दिखाई जा सकती है.

क्या हॉस्पिटल से मरीज को घर भी ला सकते हैं?
हां, इस एंबुलेंस सर्विस का इस्तेमाल हॉस्पिटल से मरीज को घर लाने के लिए भी किया जा सकता है.

एंबुलेंस हॉस्पिटल में कितनी देर रुकती है?
एंबुलेंस तब तक मरीज के साथ रहती है, जब तक उसे हॉस्पिटल की मेडिकल टीम केयर में नहीं ले लेती. अगर किसी वजह से मरीज को वहां एडमिट नहीं किया जाता, तो दूसरे हॉस्पिटल ले जाने में भी मदद की जा सकती है.

ब्लिंकिट एंबुलेंस का कितना चार्ज लगता है?
फिलहाल ब्लिंकिट की यह एंबुलेंस सर्विस पूरी तरह फ्री बताई गई है.

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