13 अगस्त 1961 को आधी रात के कुछ ही समय बाद, पूर्वी जर्मन सैनिकों ने सोवियत रूस के कंट्रोल वाले पूर्वी बर्लिन और पश्चिमी हिस्से के बीच एक अवरोध के रूप में कांटेदार तार और ईंटें बिछाना शुरू कर दिया. अगली सुबह जब बर्लिन के लोग जगे तो उन्हें शहर बीच खड़ी एक दीवार नजर आई. जिसने पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन को दो हिस्सों में बांट दिया था. बर्लिन और जर्मनी के विभाजन की कहानी काफी रोचक है.
दूसरे विश्व युद्ध के बाद , पराजित जर्मनी को सोवियत रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने आपस में बांट लिया. इस तरह जर्मनी अलग- अलग हिस्सों में बंट गया. तकनीकी रूप से राजधानी बर्लिन सोवियत क्षेत्र का हिस्सा होते हुए भी, विभाजित कर दिया गया था. इसमें सोवियत संघ ने शहर के पूर्वी हिस्से पर कब्जा कर लिया था. पश्चिमी इलाका मित्र देशों के कंट्रोल में था. ऐसा तब हुआ जब रूस ने 1948 में बर्लिन की नाकाबंदी शुरू की. तब मित्रदेशों ने हवाई हमले किया और पश्चिमी बर्लिन की नाकाबंदी के सोवियत प्रयास को विफल कर दिया. इसके बाद पूर्वी भाग सोवियत संघ के नियंत्रण में और भी मजबूती से आ गया.
अगले 12 वर्षों में अपने पश्चिमी हिस्से से अलग-थलग और मूल रूप से सोवियत संघ के एक सैटेलाइट इलाके के रूप में सिमट चुके पूर्वी जर्मनी के लगभग 25 से 30 लाख नागरिक बेहतर अवसरों की तलाश में पश्चिमी जर्मनी चले गए. 1961 तक हर दिन लगभग 1000 पूर्वी जर्मन पलायन कर रहे थे. इनमें कई कुशल श्रमिक, पेशेवर और बुद्धिजीवी शामिल थे.
अगस्त में, पूर्वी जर्मनी के कम्युनिस्ट नेता वाल्टर उलब्रिच्ट को सोवियत प्रधानमंत्री निकिता ख्रुश्चेव ने पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन के बीच सभी आवागमन को बंद करने का आदेश दिया. सैनिकों ने 12-13 अगस्त की रात को काम शुरू किया और पूर्वी बर्लिन सीमा के ठीक अंदर 100 मील से अधिक कांटेदार तार बिछा दिए.
फिर इसके ऊपर छह फुट ऊंची कंक्रीट की दीवार भी खड़ी करने लगे. कुछ दिनों 96 मील लंबी कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई. इसमें जगह- जगह कई टावर बनाए गए. इन पोस्ट पर पहरेदार मशीन गन लेकर तैनात हो गए. पूर्वी जर्मनी के अधिकारी, जिन्हें वोल्क्सपोलिज़ी के नाम से जाना जाता था. दिन-रात बर्लिन की दीवार पर गश्त करते थे.
उस पहले दिन सुबह बर्लिन के कई निवासी अचानक शहर के दूसरे हिस्से में रहने वाले अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों से कट गए. अपने मेयर विली ब्रांट की अगुआई में, पश्चिम बर्लिनवासियों ने दीवार के खिलाफ प्रदर्शन किया. जबकि ब्रांट ने पश्चिमी लोकतंत्रों, विशेष रूप से अमेरिका की, दीवार के खिलाफ कोई कदम न उठाने के लिए आलोचना की.
राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि अमेरिका केवल पश्चिम बर्लिनवासियों और पश्चिम जर्मनों की ही मदद कर सकता है और पूर्वी जर्मनों के पक्ष में किसी भी प्रकार की कार्रवाई केवल विफलता ही लाएगी.
बर्लिन की दीवार शीत युद्ध के सबसे शक्तिशाली और प्रतिष्ठित प्रतीकों में से एक थी. जून 1963 में, कैनेडी ने दीवार के सामने अपना प्रसिद्ध 'इच बिन आइन बर्लिनर' (मैं एक बर्लिनवासी हूं) भाषण दिया. लोगों के भागने के प्रयासों को रोकने के लिए 1970 में दीवार की ऊंचाई बढ़ाकर 10 फीट कर दी गई.
1961 से 1989 तक, कुल 5,000 पूर्वी जर्मन भागने में सफल रहे. कई और लोगों ने कोशिश की और असफल रहे. कुछ संभावित भगोड़ों की हाई-प्रोफाइल गोलीबारी ने पश्चिमी दुनिया की दीवार के प्रति नफरत को और भी तीव्र कर दिया.
अंततः, 1980 के दशक के बाद सोवियत संघ का जब पतन शुरू हुआ. पूर्वी जर्मनी ने कई उदारवादी सुधारों को लागू करना शुरू किया. 9 नवंबर, 1989 को, पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के लोग बड़ी संख्या में बर्लिन की दीवार पर एकत्रित हुए और उस पर चढ़कर उसे ध्वस्त करने लगे. शीत युद्ध के दमन के इस प्रतीक के नष्ट होने के साथ ही, पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी फिर से एक राष्ट्र बन गए और 3 अक्टूबर, 1990 को एकीकरण की औपचारिक संधि पर हस्ताक्षर किए गए.