झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने बुधवार को रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए. उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और राज्य सरकार को एक हफ्ते के अंदर सीबीआई जांच की सिफारिश करने का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती तो वह खुद वहीं भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे.
साथ ही पूर्व सीएम ने राज्य विधानसभा के बाहर पुलिस कार्रवाई में घायल हुए अभ्यर्थियों से मिलने सदर अस्पताल का भी दौरा किया. अस्पताल में उन्होंने घायलों का हालचाल पूछा.
'अंग्रेजी ने भी नहीं किया बच्चों से ऐसे व्यवहार'
अस्पताल में घायल अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद रघुवर दास ने कहा, 'मुझे लगता है कि अंग्रेजी सरकार ने भी हमारे बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया था. जिस तरह हमारे बच्चों को पीटा गया, पुलिस ने उन पर हमला किया, मैं इस घटना की कड़ी निंदा करता हूं. मैं मुख्यमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि सरकार किसके समर्थन से चल रही है...'
साथ ही उन्होंने जेएमएम सरकार पर लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड करने का आरोप लगाया. पूर्व मुख्यमंत्री ने 2024 में एक्साइज कांस्टेबल भर्ती की फिजिकल टेस्ट के दौरान जान गंवाने वाले 19 लोगों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस परीक्षा के दौरान 15 से अधिक अभ्यर्थियों की मौत हुई थी, जो कि हेमंत सोरेन सरकार की नाकामी को दिखाता है. रघुवर दास ने कहा कि सरकार लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है.
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ABVP ने किया देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
उधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने घोषणा की कि संगठन देश भर के 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों और हर जिले में विरोध प्रदर्शन करेगा. उन्होंने जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा को तुरंत रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग की. सोलंकी ने कहा कि लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और दमन से छात्रों की आवाज नहीं दबाई जा सकती.
एबीवीपी नेता वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एसआईटी के गठन और पुनर्गठन में बार-बार किए गए बदलावों ने जांच पर छात्रों के भरोसे को कमजोर कर दिया है. उन्होंने मांग की कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, छात्रों का आंदोलन जारी रहेगा. मंगलवार को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस ने एबीवीपी के लगभग 110 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था.
चार मंत्रियों ने बीजेपी पर साधा निशाना
वहीं, सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की ओर से चार मंत्रियों- राधा कृष्ण किशोर, शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर तीखा हमला बोला. राधा कृष्ण किशोर ने आरोप लगाया कि बीजेपी छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भड़काने के लिए बाहरी राज्यों से लोगों को ला रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसे तत्वों की पहचान कर कार्रवाई करने की अपील की. मंत्रियों ने राज्य की जांच प्रक्रिया का बचाव करते हुए सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची प्रशासन ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में देर रात बिजली बंद कर दी और छात्रों को हटाने का दबाव बनाया. हालांकि, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी केवल प्रदर्शनकारी छात्रों का हालचाल जानने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने गए थे.
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विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस एक्शन
आपको बता दें कि JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन 19वें दिन में प्रवेश कर गया और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपना धरना जारी रखे हुए हैं. सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस ने लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे थे. इस दौरान 14 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे. बीजेपी ने मंगलवार को इसके विरोध में राज्यव्यापी बंद रखा था. वर्तमान में भूख हड़ताल पर बैठे चार छात्रों का इलाज रांची सदर अस्पताल में चल रहा है, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति स्थिर बताई है. जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो और छात्र राहुल क्रांति भी अपनी हड़ताल जारी रखे हुए हैं.
बेनतीजा रहीं 6 बैठकें
इसके अलावा सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच छह दौर की बातचीत अबतक बेनतीजा साबित हुई हैं. छात्र जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में पारदर्शिता, परीक्षाओं को रद्द करने और सीबीआई या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों की समिति से जांच की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोहराया है कि उनकी सरकार भर्ती प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने का आश्वासन दिया है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल कर रही है.