जब घर बनाने की बात आती है, तो सबसे पहले ईंट, सीमेंट और लंबे समय चलने वाले कंस्ट्रक्शन का ख्याल आता है. क्योंकि, सपनों का घर तुरंत बनकर तैयार नहीं होता है. पहले ईंट और सीमेंट से दीवार, कॉलम, बीम का ढांचा तैयार होता है. फिर फिनिशिंग होती है. इसके बाद इंटीरियर और एक्सटिरियर का काम होता है. इन सब में काफी समय लग जाता है. तब जाकर घर तैयार होता है.
अब यह तस्वीर बदल रही है. कई भारतीय स्टार्टअप 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से निर्माण के तरीके को बदल रहे हैं. कम समय में मजबूत और आधुनिक इमारतें बनाई जा रही हैं. चलिए जानते कैसे इस तकनीक ने कंस्ट्रक्शन को नई दिशा दी है.
3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी की मदद से पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत कम समय में घर तैयार हो जाता है. क्योंकि इसमें ईंट-गारे, सीमेंट, बजरी और मसाला बनाने और दीवार जोड़ने जैसे काम नहीं होते हैं. इसके अलावा अधिक मजदूरों की भी जरूरत नहीं पड़ती.
कंप्यूटर पर बने डिजाइन से हूबहू मशीन बना देता है घर
इस टेक्नोलॉजी के जरिए घर बनाने में सबसे पहले कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से घर का एक सटीक 3डी मॉडल या ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता है. इसमें दरवाजे, खिड़की और अन्य चीजों की सही माप होती है.
इसके बाद निर्माण स्थल पर एक बड़े आकार का 3D प्रिंटर मशीन या रोबोटिक आर्म लगाया जाता है. यह विशालकाय रोबोटिक थ्रीडी प्रिंटिंग मशीन में घर के डिजाइन का डेटा होता है. इसे कंप्यूटर से कमांड दिया जाता है.
फिर इस मशीन के रोबोटिक आर्म और इसके बड़े- बड़े अलग- अलग आकार के नोजल परत-दर-परत घर का निर्माण शुरू कर देते हैं. यह प्रिंटर एक विशेष प्रकार के कंक्रीट या सीमेंट के मिश्रण को नोजल के जरिए बेहद सटीकता से एक के ऊपर एक परत के रूप में बाहर निकालता है. इसी से दीवार, छत, फ्लोर और बाकी कंस्ट्रक्शन का काम होता चला जाता है.
इस विशेष मिश्रण की परतें तुरंत सूखकर ठोस हो जाती हैं, जिससे बिना रुके लगातार दीवारें खड़ी होती जाती हैं. इस तकनीक से घर बनाने में काफी समय बचता है. इसके साथ ही मजदूरी में लगने वाला खर्च भी कम हो जाता है. जहां पारंपरिक निर्माण में बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत होती है. वहीं 3डी प्रिंटिंग पूरी तरह ऑटोमेशन पर काम करती है. इस टेक्नोलॉजी के जरिए कुछ ही लोग घर बनाने की पूरे प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं.
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3डी तकनीक से घर बनाने में ईंट और प्लास्टर का झंझट खत्म हो जाता है. दीवारों को अलग से जोड़ने या ईंटें लगाने की जरूरत नहीं होती. आसान शब्दों में समझें तो कंप्यूटर से जुड़ी विशालकाय थ्रीडी प्रिंटिंग मशीन सीधे सीधे दीवारें प्रिंट कर देती है. बस इसमें मटेरियल सीमेंट और दूसरे कंपोजिट कंक्रीट होती हैं.
सिर्फ 24 घंटे में तैयार हो जाता है ढांचा
3डी प्रिंटिंग तकनीक से कम समय में ढांचा तैयार हो जाता है. इस तकनीक से एक सामान्य आकार के घर या ऑफिस का फ्रेमवर्क केवल 24 से 48 घंटों या कुछ ही हफ्तों में बनकर तैयार हो जाता है.
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इस आधुनिक टेक्नोलॉजी से घर बनाने में बिल्डिंग मटेरियल की बर्बादी भी नहीं होती है. क्योंकि, ऑटोमेशन और रोबोटिक सटीकता के कारण केवल जरूरी मात्रा में ही मटेरियल का इस्तेमाल होता है. इससे समय की बर्बाद होने से भी बच जाता है.