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उत्तराखंड: कर्णप्रयाग झड़प मामले में चार निहंग सिखों को मिली जमानत

उत्तराखंड के कर्णप्रयाग हिंसक झड़प मामले में गिरफ्तार चार निहंग सिखों को चमोली जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है. अदालत ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया. बचाव पक्ष ने आरोपियों को निर्दोष बताया, जबकि अभियोजन ने जमानत का विरोध किया. अदालत ने घटना को अचानक हुए विवाद का परिणाम मानते हुए जमानत दी. इससे पहले इन गिरफ्तारियों को लेकर उत्तराखंड में कई दिनों तक तनाव और विरोध प्रदर्शन भी हुए थे.

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(Photo: Representational)
(Photo: Representational)

उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग में 16 जून को हुए हिंसक विवाद के मामले में गिरफ्तार चार निहंग सिखों को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है. अदालत ने सतविंदर सिंह, अजय सिंह, जसनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की दो-दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया.

चारों आरोपियों के खिलाफ कर्णप्रयाग थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. 16 जून को कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था. आरोप है कि इस दौरान तलवारें चलीं, जिसमें कई लोग घायल हुए. घटना में एक निहंग सिख भी घायल हुआ था. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया था.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है. वकील ने कहा कि सभी निहंग सिख धार्मिक यात्रा पर थे और उन पर स्थानीय लोगों ने हमला किया, जिसमें मनप्रीत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए.

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपियों के बाहर आने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका हो सकती है. अभियोजन ने यह भी बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरू हुआ विवाद बढ़ गया था और जांच के दौरान धाराओं में संशोधन भी किया गया.

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि घटना पूर्व नियोजित दुश्मनी का परिणाम नहीं बल्कि सड़क पर अचानक हुए विवाद से जुड़ी प्रतीत होती है. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपियों पर लगी धाराओं में अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है. इसके आधार पर अदालत ने बिना मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए चारों आरोपियों को जमानत देने का आदेश दिया.

गौरतलब है कि इन गिरफ्तारियों के बाद रुद्रप्रयाग के नागरासू गुरुद्वारे में कई दिनों तक गतिरोध बना रहा था, जो सिख प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता के बाद समाप्त हुआ. वहीं 25 जून की रात कुछ निहंग सिख उत्तराखंड सीमा में प्रवेश कर गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग कर रहे थे. प्रशासन ने उन्हें समझाकर वापस भेज दिया था और स्पष्ट किया था कि रिहाई केवल अदालत के आदेश के बाद ही संभव होगी.

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