पर्शियन गल्फ क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने संकेत दिया है कि भारत को दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है.
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत ईरान का दोस्त है और इस वजह से भारतीय जहाजों के लिए इस समुद्री मार्ग से गुजरने को लेकर सकारात्मक स्थिति जल्द सामने आ सकती है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पर्शियन गल्फ क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर पूरी दुनिया की नजर है.
#WATCH | Delhi: On giving safe passage to India, Iran's Ambassador to India, Mohammad Fathali, says, "... Yes, because India is our friend. You will see it within two or three hours. We believe that Iran and India share common interests in the region..." pic.twitter.com/twTsE1Bjhv
— ANI (@ANI) March 13, 2026
पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच आया ईरान का बयान
जब पत्रकारों ने उनसे सीधे पूछा कि क्या भारत को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रास्ता मिलेगा, तो राजदूत ने सकारात्मक संकेत दिया. उन्होंने कहा कि इस दिशा में जल्द ही स्थिति साफ हो सकती है. उन्होंने कहा, हां, क्योंकि भारत हमारा दोस्त है. आप इसे दो या तीन घंटे के भीतर देखेंगे. उनका यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान भारत के जहाजों के लिए इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को खुला रखने की दिशा में सकारात्मक रुख रखता है.
दुनिया के अहम समुद्री मार्ग पर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चर्चा
इसके अलावा राजदूत मोहम्मद फतहाली ने यह भी कहा कि भारत और ईरान के बीच क्षेत्रीय स्तर पर कई साझा हित हैं. उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देश लंबे समय से एक-दूसरे के साथ सहयोग करते रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान का मानना है कि भारत और ईरान के क्षेत्र में समान हित हैं और दोनों देश कई मुद्दों पर साथ काम करते हैं. यही वजह है कि मौजूदा हालात में भी भारत को लेकर ईरान का रुख सकारात्मक है.
लंबे समय से चले आ रहे संबंध
ईरान के राजदूत ने भारत और ईरान के संबंधों को दोस्ती और सहयोग पर आधारित बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से अच्छे रिश्ते रहे हैं और दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते रहे हैं. उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि ईरान और भारत दोस्त हैं. हमारे साझा हित हैं और कई मामलों में समान सोच भी है. फतहाली ने यह भी कहा कि भारत ने कठिन समय में ईरान की मदद की है और दोनों देशों के बीच सहयोग की भावना हमेशा बनी रही है.
मुश्किल समय में भारत के सहयोग का जिक्र
राजदूत ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारत ने मुश्किल दौर में ईरान का साथ दिया है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में ईरान की मदद की है. उन्होंने कहा, भारत में ईरान के राजदूत के रूप में मैं यह कह सकता हूं कि युद्ध के बाद की स्थिति में भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में हमारी मदद की. उनका यह बयान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और भरोसे को दिखाता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज की रणनीतिक अहमियत
बता दें, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. इस संकरे समुद्री रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति गुजरती है. यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाले किसी भी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है. दुनिया के कई देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है. भारत के लिए भी यह रास्ता काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है.
वैश्विक व्यापार पर भी पड़ता है असर
अगर इस समुद्री मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर सिर्फ तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ता है. यही वजह है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुनिया भर की सरकारें और शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. इसी संदर्भ में ईरान के राजदूत का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है. उन्होंने जिस तरह भारत को दोस्त बताते हुए सुरक्षित रास्ते की बात कही है, उससे यह संकेत मिलता है कि भारत और ईरान के बीच समुद्री आवाजाही को लेकर सहयोग जारी रह सकता है.
संघर्ष के बीच बढ़ी निगरानी
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है. कई देश और शिपिंग कंपनियां इस क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रम पर लगातार निगरानी कर रही हैं. ऐसे माहौल में भारत को लेकर ईरान की तरफ से आया यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच समुद्री मार्गों को लेकर सहयोग बना रह सकता है और भारतीय जहाजों को इस अहम समुद्री रास्ते से गुजरने में सुविधा मिल सकती है.