राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के आपत्तिजनक बयान का मुद्दा उठा. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने यह मुद्दा उठाया. इस पर सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ. विपक्षी दल के सदस्यों ने बीएसपी का समर्थन करते हुए वीके सिंह के खिलाफ नारेबाजी हुई. संघ प्रमुख मोहन भागवत के राम मंदिर पर दिए बयान का मुद्दा भी उठा. इसके बाद भारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी.
वीके सिंह ने हरियाणा में दो दलित बच्चों को जलाकर मार डालने की घटना के संदर्भ में 22 अक्टूबर को कहा था कि 'यह एक पारिवारिक मामला था. हर मुद्दे पर केंद्र सरकार को कोसना बंद करें. कोई कुत्ते को पत्थर मार दे उसमें केंद्र सरकार क्या कर सकती है.' उनके इस बयान पर तब भी हंगामा हुआ था. हालांकि इसके बाद वीके सिंह ने सफाई में कहा था कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया. वहीं, भागवत ने कोलकाता में कहा था कि .
राज्यसभा में बसपा और कांग्रेस के कई सदस्यों ने सिंह के सदन में आने पर ही आपत्ति जताई. सरकार से उन्हें बर्खास्त करने की मांग भी की. विपक्षी सदस्य उनसे सदन से जाने की मांग करते रहे. एक दिन पहले सिंह जैसे ही सदन में आए बीएसपी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि इन्हें सदन में एक मिनट भी बैठने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है.
लोकसभा में भी उठा था मुद्दा
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिकायत की थी कि सरकार ने असहिष्णुता पर बहस के दौरान वीके सिंह की दलितों के बारे में की गई टिप्पणी पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने सदन में मौजूद पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा कि सिंह के खिलाफ वह क्या कार्रवाई करेंगे? इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया गांधी की गैर मौजूदगी में सांसदों की बैठक भी बुलाई थी. माना जा रहा है कि इसी बैठक में यह मुद्दा उठाने की रणनीति बनी.