पंजाब में पटियाला में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चल रही है. इस बीच कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के परिवार से जुड़ा एक मामला सामने आया है. SIR के दौरान डॉ. गांधी का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं हुआ था. बाद में तय प्रक्रिया के तहत उनका नाम सूची में दर्ज कर दिया गया. हालांकि, इस पूरे मामले में अब उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को जारी नोटिस जारी किया गया है.
डॉ. धर्मवीर गांधी का कहना है कि उन्हें इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर कोई नोटिस नहीं मिला. उनका नाम बाद में वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया. इसके बाद परिवार के दूसरे सदस्यों को नोटिस जारी किए गए हैं. इसको लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं.
डॉ. गांधी ने बताया कि उनके परिवार के चार सदस्यों को नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें उनकी पत्नी, बेटा, बेटी और बहू शामिल हैं. उनकी पत्नी के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट भी है. सांसद का कहना है कि इन सभी परिवार के सदस्यों से जुड़े दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं.
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डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा कि परिवार के सदस्यों का संबंधित डेटा अभी तक मैप नहीं किया गया है. इसी वजह से नोटिस जारी होने की बात सामने आई है. परिवार की ओर से नोटिस की प्रतियां भी उपलब्ध कराई गई हैं.
डॉ. धर्मवीर गांधी ने सांसदों को लेकर एक और दावा किया है. उनका कहना है कि सांसदों को नोटिस जारी करने से पहले यह पुष्टि की जाती है कि संबंधित व्यक्ति सांसद है या नहीं. इसके बाद उसे VIP श्रेणी में देखा जाता है. सांसदों को नोटिस जारी करने से पहले इस तरह की जांच की जाती है. इसका मकसद किसी तरह के विरोध या विवाद से बचना बताया गया है. इसी वजह से उनके नाम पर कोई नोटिस जारी नहीं किया गया.
हालांकि, परिवार के दूसरे सदस्यों को नोटिस मिलने के बाद यह मामला अब चर्चा में है. सवाल यह है कि अगर सांसद का नाम मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया है, तो उनके परिवार के सदस्यों के रिकॉर्ड को लेकर अलग स्थिति क्यों बनी.
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डेटा मैपिंग को लेकर भी उठ रहे सवाल
SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के पुराने और मौजूदा रिकॉर्ड को जोड़ने की प्रक्रिया अहम मानी जाती है. इसी प्रक्रिया के दौरान डॉ. गांधी के परिवार के सदस्यों का डेटा मैप नहीं होने की बात सामने आई है.
परिवार का कहना है कि उनके पास जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं. इसके बावजूद नोटिस जारी किए गए हैं. अब इन दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी.
इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों के आधिकारिक जवाब का इंतजार है. अधिकारियों की ओर से अगर यह बताया जाता है कि नोटिस किस आधार पर जारी हुए और डेटा मैप क्यों नहीं हुआ, तो पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है.
फिलहाल, सांसद का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो चुका है. वहीं, परिवार के चार सदस्यों को नोटिस जारी होने से SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.