चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. अब तय नियमों के तहत आने वाले रिहायशी मकानों में 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (B&B) यानी होमस्टे चलाने की मंजूरी दे दी गई है. चंडीगढ़ प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की हरी झंडी के बाद संपदा विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. इस नीति का मुख्य मकसद पर्यटकों को साफ-सुथरा और किफायती ठहरने का विकल्प देना है, जिससे मकान मालिकों की कमाई का एक नया जरिया भी खुलेगा.
इस नई पॉलिसी के तहत शहर के सभी मकानों में होमस्टे नहीं खोला जा सकेगा. इसके लिए मकान का साइज कम से कम 500 वर्ग गज होना जरूरी है. होमस्टे चलाने के लिए प्रॉपर्टी के असली मालिक को ही पर्यटन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसके साथ ही प्रशासन से जुड़े विभागों से सभी जरूरी मंजूरियां और एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य किया गया है.

प्रशासन ने साल 2008 में भी ऐसी ही एक योजना शुरू की थी, लेकिन मकानों को मिनी होटल में बदलने और उसके गलत इस्तेमाल के बाद उसे वापस ले लिया गया था. इस बार नियमों को बेहद सख्त बनाया गया है. होमस्टे चलाने वाले अपने घर के बाहर कोई फ्रंट ऑफिस या रिसेप्शन नहीं बना सकते. इसके अलावा घर के रिहायशी लुक में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. घर से किसी भी तरह की कमर्शियल गतिविधि जैसे क्लाउड किचन, टूर-ट्रैवल सर्विस या बाहरी लोगों के लिए खाने-पीने की सुविधा देने पर पूरी तरह रोक रहेगी.
पड़ोसियों को दिक्कत हुई तो रद्द होगा लाइसेंस
नीति में साफ किया गया है कि होमस्टे में आने वाले मेहमानों की वजह से पड़ोसियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. अगर किसी मालिक ने नियमों का उल्लंघन किया, गलत जानकारी दी या पड़ोसियों को असुविधा हुई, तो प्रशासन रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है. नियमों को तोड़ने पर 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. राहत की बात यह है कि इन होमस्टे को कमर्शियल नहीं माना जाएगा, इसलिए इनसे घरेलू दरों पर ही बिजली-पानी का बिल और प्रॉपर्टी टैक्स लिया जाएगा.