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धारा-370, जीएसटी, ट्रिपल तलाक... 12 साल में पीएम मोदी के 12 ऐतिहासिक फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर '12 साल में 12 बड़े फैसले' उनके मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं. धारा 370 के खात्मे, राम मंदिर निर्माण और जीएसटी से लेकर डिजिटल इंडिया और तीन तलाक खत्म करने जैसे ऐतिहासिक कदमों ने देश के सामाजिक-आर्थिक और वैचारिक ताने-बाने को बदलकर रख दिया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo-ITG)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Photo-ITG)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर बीजेपी जहां इसे देशव्यापी सेवा पखवाड़े के रूप में मना रही है. पिछले 12 वर्षों के 'मोदी युग' के उस ऐतिहासिक सफर का लेखा-जोखा भी रखा जा रहा है, जिसने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक साख को नई दिशा दी है. 2014 में केंद्र की सत्ता की कमान संभालने के बाद से पीएम मोदी ने कई ऐसे साहसिक और दूरगामी फैसले लिए, जिन्होंने सदियों पुराने विवादों पर न केवल पूर्णविराम लगाया बल्कि भारतीय राजनीति के स्थापित ढर्रे को ही पूरी तरह से बदलकर रख दिया.

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का ऐतिहासिक निरसन, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीति पर कड़ा कानून बनाना जहां पार्टी के वैचारिक संकल्पों की सिद्धि रहा, वहीं जीएसटी (GST) का क्रियान्वयन, नोटबंदी, डिजिटल इंडिया और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदमों ने देश के आर्थिक और सुरक्षा तंत्र को बुनियादी तौर पर नए सिरे से ढाला है. 

मोदी सरकार के तमाम फैसलों ने न केवल देश के भीतर 'राष्ट्रवाद' और 'लाभार्थी वर्ग' का एक नया समीकरण गढ़ा, बल्कि दुनिया भर में भारत को एक कठोर फैसले लेने वाले मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया. पीएम मोदी के फैसलों ने 'विरासत भी, विकास भी' के मंत्र को साकार किया है. आज उनके जन्मदिन के इस मोड़ पर 12 वर्षों के दौरान लिए गए ये 12 मील के पत्थर न केवल 2029 और उससे आगे के राजनीतिक एजेंडे को दिशा दे रहे हैं, बल्कि 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प की सबसे मजबूत बुनियाद भी साबित हो रहे हैं.

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1. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का खात्मा 
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में लिया गया यह अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक राजनीतिक फैसला माना जाता है. 5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर नया इतिहास रचाय इस फैसले ने घाटी की सियासत और सुरक्षा व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया. इसके साथ श्याम प्रसाद मुखर्जी का एक देश और एक विधान का सपना साकार हुआ. 

2. प्रधानमंत्री का नोटबंदी का फैसला 
8 नवंबर 2016 की वो रात कोई नहीं भूल सकता, जब पीएम मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए अचानक नोटबंदी का फैसला लिया. देश में 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का ऐलान कर दिया. भ्रष्टाचार और काले धन पर प्रहार के नाम पर लिए गए इस फैसले ने पूरे देश को कतारों में खड़ा कर दिया था. इस फैसले की आर्थिक मोर्चे पर विपक्ष ने काफी आलोचना भी हुई, लेकिन इसने देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन की नींव रख दी.

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3. महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण
संसद के विशेष सत्र में मोदी सरकार ने दशकों से लटके महिला आरक्षण बिल को पास कराकर नया इतिहास रच दिया. इस कानून के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया, जो भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है. आधी आबादी की राजनीति में सिर्फ भागीदारी ही नहीं बल्कि हिस्सेदारी भी बढ़ेगी, राज्यों के विधानसभा और संसद में 33 फीसदी महिलाएं होंगी. 

4. तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को निजात 
मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने का काम किया है. मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दिलाने के नाम पर मोदी सरकार ने 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम' पारित किया. इसके तहत एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देने को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध बना दिया गया। विपक्ष ने इसे निजी कानूनों में दखल बताया, जबकि सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम घोषित किया. 

5. जीएसटी का फैसला 'एक देश, एक टैक्स'

आजादी के बाद देश के टैक्स सिस्टम में इसे सबसे बड़ा सुधार माना गया. मोदी सरकार ने टैक्स सिस्टम में सुधार के लिए बड़ा कदम उठाया. 1 जुलाई 2017 की आधी रात को संसद के सेंट्रल हॉल से देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया. इस तरह दर्जनों अप्रत्यक्ष करों को खत्म कर 'वन नेशन, वन टैक्स' का सपना साकार किया गया. शुरुआती दिक्कतों के बाद आज जीएसटी कलेक्शन हर महीने रिकॉर्ड तोड़ रहा है, लेकिन इसे लेकर विपक्ष आज भी आलोचना करता है. 

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6. डिजिटल इंडिया और जनधन खाता
 2015 में शुरू हुए 'डिजिटल इंडिया' अभियान और JAM (जनधन, आधार, मोबाइल) ट्रिनिटी ने भारत की तस्वीर बदल दी. देश में रेहड़ी-पटरी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह 'यूपीआई' का सिक्का चलता है. भारत आज दुनिया में सबसे ज्यादा डिजिटल भुगतान करने वाला देश बन चुका है, जिसने भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को न्यूनतम कर दिया है.

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मोदी सरकार ने 28 अगस्त 2014 को देश की जनता को बैंकिंग से जोड़ने के लिए जन-धन योजना की घोषणा की थी. इस योजना के तहत 31.31 करोड़ लोगों के खाते खोले गए. देश में बैंकों ने कैंप लगाकर वंचित लोगों के खाते खोलकर उन्हें बैंकिंग सुविधा से जोड़ने का काम किया था. इसी का नतीजा है कि डिजिटल लेन-देन में भारत आज दुनिया में नंबर वन देश है. 

7. अग्निवीर: सेना में भर्ती का नया मॉडल 
मोदी सरकार ने सेना में भर्ती का एक नया मॉडल लेकर आई, जिसे लेकर सियासत गर्मा गई थी. भारतीय सेनाओं को युवा और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए मोदी सरकार 'अग्निपथ योजना' लेकर आई. इसके तहत युवाओं को 4 साल के लिए 'अग्निवीर' के रूप में सेना में सेवा करने का मौका दिया गया. इस योजना को लेकर युवाओं ने देश के कई हिस्सों में उग्र प्रदर्शन किए और यह आज भी देश की राजनीति में एक बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है, विपक्ष ने भी सरकार को काफी घेरा था.

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8. अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण 
दशकों पुराने अयोध्या में राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से फैसला आया, लेकिन अदालत से निर्णय के बाद मोदी सरकार जिस तरह एक्टिव हुई. राम मंदिर के निर्माण कराने का फैसला किया. इसके लिए सरकार ने ट्रस्ट का गठन कर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया. 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की गई, जिसमें पीएम मोदी खुद शामिल हुए थे. इसे बीजेपी और मोदी सरकार के सांस्कृतिक एजेंडे की सबसे बड़ी जीत के रूप में देखा जाता है.

9. शिक्षा नीति से कानून तक में बदलाव 
34 साल बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई. इसके अलावा मोदी सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आपराधिक कानूनों (IPC, CrPC और Evidence Act) को बदलकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे नए कानूनों को लागू किया, जिसे देश के कानूनी इतिहास में 'वि-औपनिवेशीकरण' का बड़ा कदम माना गया.

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मोदी सरकार ने अपने 12 साल के कार्यकाल में लिए फैसलों ने यह साफ कर दिया कि मौजूदा सरकार जोखिम लेने और कड़े फैसले करने से पीछे नहीं हटती. जहां समर्थक इन फैसलों को 'विकसित भारत' की मजबूत नींव बताते हैं, वहीं विरोधी इन्हें लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश की आर्थिक गति के लिए चुनौती मानते.

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10. नागरिकता संशोधन कानून लागू किया 
मोदी सरकार ने साल नागरिकता संशोधन कानून लेकर आई. 2019 में संसद से पास होने के बाद सीएए को लेकर देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन. मुस्लिम महिलाओं के द्वारा शाहीन बाग जैसे आंदोलन देखने को मिले. इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया. मोदी सरकार ने कड़े विरोध के बावजूद इसे लागू करने का अपना संकल्प पूरा किया, अब इस कानून के तहत देश भर में रह रहे गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का काम किया जा रहा. 

11. मोदी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सैन्य रणनीति को पूरी तरह बदल दिया. नरेंद्र मोदी सरकार में भारतीय सेना ने जबरदस्त पराक्रम का प्रदर्शन कर ये दिखा दिया कि भारत की रक्षा शक्ति दुनिया के किसी विकसित देश से कम नहीं है. साथ ही मोदी सरकार ने संदेश दिया कि कड़े फैसले लेना में हम भी पीछे नहीं है. 

सर्जिकल, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए ये बता दिया कि भारत पारंपरिक लड़ाई के साथ साथ मॉडर्न लड़ाई में दुनिया की पेशेवर सेनाओं में से एक है. उरी आंतकी हमले के बाद 28 सितंबर 2016 को दुनिया का आधा हिस्सा सो रहा था और भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का मुंहतोड़ जवाब दे रही थी. भारतीय कमांडोज पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के लॉन्च पैड्स पर हमला कर उन्हें तबाह कर दिया था. इसके बाद पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को बालाकोट एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया.

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पहलगाम हमले के गुनहगारों को ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सबक सिखाया. भारतीय जवानों ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया था. दुनिया को संदेश दिया कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रुख अपना सकता है, 

12. सवर्ण जातियों को आरक्षण का फैसला

सवर्ण आरक्षण की मांग देश में लंबे समय से हो रही थी, लेकिन किसी भी सरकार ने हाथ नहीं डाला. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के आखिरी समय 2019 के जनवरी में सवर्ण जातियों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया. इस सवर्ण आरक्षण विधेयक को दोनों सदनों से पास कराकर कानूनी अमलीजामा पहना दिया. इसके जरिए सवर्ण समुदाय के लोग सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.

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