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मनीष तिवारी के लगातार 13 स्थगन प्रस्ताव, बताया दलबदल विरोधी कानून पर बहस क्यों जरूरी

संसद के मॉनसून सत्र में जहां विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है, वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी एक ही मुद्दे को बार-बार उठाकर चर्चा में हैं. उन्होंने दलबदल विरोधी कानून में बदलाव की मांग को लेकर लगातार 13 स्थगन प्रस्ताव दिए हैं. उनका कहना है कि यही कानून आज भारतीय लोकतंत्र की कई समस्याओं की जड़ बन चुका है.

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मनीष तिवारी बोले कि दलबदल विरोधी कानून में व्यापक सुधार जरूरी (फाइल फोटो- ITG)
मनीष तिवारी बोले कि दलबदल विरोधी कानून में व्यापक सुधार जरूरी (फाइल फोटो- ITG)

संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान जहां विपक्ष का ध्यान छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और अयोध्या चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर रहा है, वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता और चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद मनीष तिवारी लगातार एक मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे हैं... दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection law).

लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, तिवारी ने मौजूदा सत्र के दौरान अब तक 14 स्थगन प्रस्ताव (adjournment notices) दिए हैं. इनमें से 13 प्रस्तावों में दलबदल विरोधी कानून में सुधार पर व्यापक चर्चा की मांग की गई थी. एकमात्र अपवाद 28 जुलाई को हुआ, जब उन्होंने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया था.

स्थगन प्रस्ताव के ज़रिए संसद सदस्य, स्पीकर की मंज़ूरी मिलने पर, सदन के तय कामकाज को रोककर किसी ज़रूरी सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकते हैं.

इंडिया टुडे डिजिटल से बात करते हुए तिवारी ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून में व्यापक सुधार ज़रूरी है क्योंकि यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के सामने मौजूद कई समस्याओं की जड़ में है.

दलबदल को 'जनता के भरोसे के साथ धोखा' बताते हुए तिवारी ने कहा कि विधायक एक राजनीतिक दल के जनादेश पर चुने जाते हैं लेकिन बाद में अपना पाला बदल लेते हैं, जिससे चुनावी जनादेश कमजोर होता है.

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मनीष तिवारी ने कहा, 'यह जनता के भरोसे के साथ धोखा है. विधायक एक राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव जीतते हैं और बाद में दूसरे दल में शामिल हो जाते हैं. आज की संसद मूल रूप से 2024 के आम चुनाव के जनादेश से अलग है. मौजूदा राजनीति और संसद तेज़ी से सत्ता में बैठे लोगों की मर्ज़ी से चल रही है.'

जब उनसे पूछा गया कि वे इस मुद्दे को क्यों उठाते रहे जबकि विपक्ष साथ ही साथ हालिया Gen Z विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सरकार को घेर रहा था, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर सांसद को स्थगन प्रस्तावों के जरिए उन मुद्दों को उठाने का अधिकार है जिन्हें वे महत्वपूर्ण मानते हैं.

उन्होंने कहा कि दलबदल विरोधी कानून पर बार-बार प्रस्ताव पेश करना स्पीकर और जनता का ध्यान उस समस्या की ओर खींचने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जिसे उन्होंने एक बढ़ती हुई बुराई बताया जिस पर तत्काल संसदीय बहस की जरूरत है.

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