बिजनेस टुडे के 'इंडिया एट 100' इवेंट में बोलते हुए वेस्ट बंगाल के फाइनेंस मिनिस्टर स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल की मौजूदा आर्थिक स्थिति, औद्योगिक चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य पिछले पांच दशकों से लगातार गिरावट का सामना कर रहा है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि सही सोच और नीतियों के साथ बंगाल का गौरव वापस लाया जा सकता है.
पश्चिम बंगाल से युवाओं और टैलेंट के लगातार हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की प्रतिभाएं पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना रही हैं, लेकिन अपने ही राज्य में नहीं रुक रही हैं, कोलकाता अब बुज़ुर्ग पेंशनभोगियों का शहर बनकर रह गया है. युवा बेंगलुरु, गुरुग्राम, नोएडा या विदेश चले गए हैं, वे हमेशा के लिए बाहर जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि एक धारणा है कि बंगाली बिज़नेस-विरोधी होते हैं, हमें इस सोच को बदलना होगा, सिंगुर से टाटा के बाहर निकलने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "अगर टाटा पश्चिम बंगाल में बिज़नेस नहीं कर सकते, तो हम कौन होते हैं कुछ करने वाले?
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बुद्धिजीवियों पर निशाना और बिज़नेस कम्युनिटी का समर्थन
स्वपन दास ने राज्य के बुद्धिजीवी वर्ग के रवैये पर सवाल उठाए और कहा कि लंबे समय से राज्य के कारोबारियों की सोच को दबाकर रखा गया है, हमें निराशा के इस माहौल को खत्म करना होगा और लोगों की उम्मीदों का स्तर बढ़ाना होगा. एक वर्ग है जो कहता है कि पश्चिम बंगाल के साथ यह सबसे बुरी चीज़ हुई है यानी तथाकथित बुद्धिजीवी, वे हमसे नफ़रत करते हैं.
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बिज़नेस कम्युनिटी की ऊर्जा और सोच को दबाकर रखा गया, लेकिन अब वे अपनी क्रिएटिविटी को सामने लाना चाहते हैं.
ज़मीन की चुनौती और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्लान
राज्य में उद्योगों के लिए ज़मीन के मुद्दे को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि सुधार और ज़मीन की उपलब्धता पर व्यावहारिक रणनीति अपनानी होगी, बंगाल में ज़मीन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहेगी, ज़मीन के टुकड़े बहुत छोटे हैं और मालिकाना हक़ का सिस्टम बेहद उलझा हुआ है.
स्वपन दास के अनुसार, बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बांकुरा, पुरुलिया और झारग्राम जैसे क्षेत्रों की ओर रुख करना होगा जहां आवश्यक भूमि उपलब्ध हो सकती है, इसके साथ ही, राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देने के लिए कल्याणी एक्सप्रेसवे के किनारे एक नया इंडस्ट्रियल बेल्ट विकसित किया जा रहा है, जबकि पारंपरिक औद्योगिक केंद्र माने जाने वाले दुर्गापुर-आसनसोल बेल्ट को फिर से जीवित करने के प्रयास जारी हैं.
भविष्य का बंगाल: डीप टेक, सेमीकंडक्टर और टिकाऊ ग्रोथ
बंगाल के पास मौजूद मजबूत शैक्षणिक और सांस्कृतिक आधार का जिक्र करते हुए स्वपन दास ने जोर दिया कि राज्य मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और खास तौर पर डीप टेक में बड़ी वापसी कर सकता है.
सेमीकंडक्टर या क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए हमारे पास ऐसे संस्थान हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है, डेटा सेंटर्स शब्द का इस्तेमाल बहुत आसानी से कर लिया जाता है, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले पानी और बिजली की भारी मात्रा के बारे में सोचना ज़रूरी है,
अंतिम लक्ष्य: भारत में सबसे तेज ग्रोथ रेट
स्वपन दास ने किसी भी रातों-रात चमत्कार की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि बदलाव को साबित करके दिखाना होगा. चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती, यह हमें करके दिखाना है और साबित करना है कि यह बदलाव टिकाऊ है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर अगले चार सालों में पश्चिम बंगाल भारत में सबसे ज़्यादा ग्रोथ रेट हासिल कर लेता है, तो राज्य का ऐतिहासिक गर्व और आत्मविश्वास पूरी तरह से वापस आ जाएगा.