स्वपन दासगुप्ता (Swapan Dasgupta) भारत के जाने-माने पत्रकार, लेखक और राजनेता हैं. उन्हें खास तौर पर भारतीय राजनीति, मीडिया और दक्षिणपंथी विचारधारा पर अपनी स्पष्ट राय रखने के लिए जाना जाता है. 2026 बंगाल विधानसभा चुनाव में रासबिहारी सीट से बीजेपी के उम्मीदवार स्वप्न दासगुप्ता ने जीत दर्ज की.
उन्होंने लंबे समय तक देश के बड़े अंग्रेजी अखबारों में लेख लिखे और टीवी डिबेट्स में भी सक्रिय भागीदारी निभाई. वर्तमान में वह West Bengal की रसबिहारी विधानसभा सीट से विधायक हैं. इससे पहले वह राज्यसभा के नामित सदस्य भी रह चुके हैं.
स्वपन दासगुप्ता का जन्म 3 अक्टूबर 1955 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में एक बंगाली बैद्य परिवार में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई सेंट पॉल्स स्कूल और ला मार्टिनियर स्कूल, कलकत्ता से हुई. इसके बाद उन्होंने St. Stephen's College से 1975 में ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन के कारण उन्हें प्रतिष्ठित इनलैक्स स्कॉलरशिप भी मिली. आगे की पढ़ाई के लिए वह ब्रिटेन गए, जहां उन्होंने School of Oriental and African Studies से एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की.
करियर की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया, लेकिन जल्द ही वह रिसर्च और शिक्षण की दुनिया में लौट गए. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नफील्ड कॉलेज में उन्होंने दक्षिण एशियाई राजनीति पर रिसर्च और अध्यापन किया. बाद में भारत लौटकर उन्होंने पत्रकारिता में अपनी मजबूत पहचान बनाई.
स्वपन दासगुप्ता ने The Indian Express, The Times of India, The Statesman और India Today जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में संपादकीय पदों पर काम किया. वह भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर टीवी चैनलों में अक्सर दिखाई देते रहे हैं.
2015 में उन्हें साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया. उन्होंने Awakening Bharat Mata: The Political Beliefs of the Indian Right नामक पुस्तक भी लिखी, जिसमें भारतीय दक्षिणपंथी राजनीति के विचारों को विस्तार से समझाया गया है.
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनकी पत्नी रेशमी रे दासगुप्ता मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और उनका एक बेटा है, जो सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं. परिवार वर्तमान में कोलकाता में रहता है.
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि वे TMC के पतन पर जरा सा भी दुखी नहीं हो रहे हैं लेकिन बीजेपी को जरूर आगाह करना चाहेंगे कि टीएमस के कुछ नेता जो अभी बीजेपी के बंधु बनने की कोशिश कर रहे हैं उनसे सतर्क रहा जाए.