अमेरिकी सीनेट ने हाल ही में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को हरी झंडी दे दी है. यह बिल रूस से तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाने की परमिशन देता है. बिल के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति और अधिकार मिलता है. इसे मंजूरी मिलने के बाद भारत ने कहा है कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है. अब यह बिल आगे विचार के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाएगा.
भारत कई देशों से कराता है ऊर्जा आयात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख पहले भी कई बार स्पष्ट किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हितों और 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने पर आधारित है. इसके लिए भारत विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात करता है, जिनमें अमेरिका भी शामिल है.
रणधीर जायसवाल ने यह बयान उस सवाल के जवाब में दिया, जिसमें अमेरिकी सीनेट की ओर से 86-12 मतों से पारित किए गए विधेयक पर भारत की प्रतिक्रिया पूछी गई थी. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत अमेरिका के संबंधित पक्षों के साथ विभिन्न स्तरों पर लगातार संपर्क बनाए हुए है और स्थिति पर नजर रखे हुए है.
क्या है अमेरिकी बिल?
लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026' नामक इस विधेयक का उद्देश्य रूस और यूक्रेन युद्ध में उसका समर्थन करने वाले देशों एवं संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना है. इसके तहत रूस के सरकारी अधिकारियों, उद्योगपतियों (ओलिगार्क), उनके परिवारों, रूसी बैंकों, वित्तीय संस्थानों और तथाकथित 'शैडो फ्लीट' को निशाना बनाया गया है. शैडो फ्लीट उन जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचते हुए रूसी तेल के निर्यात के लिए किया जाता है.
विधेयक की धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वे उन देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगा सकें, जो बड़ी मात्रा में रूसी तेल या गैस खरीदते हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं.
इस प्रावधान के दायरे में भारत और चीन के अलावा स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान भी शामिल हैं, क्योंकि ये रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाले देशों में हैं. साथ ही विधेयक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को हर 180 दिन में इन शीर्ष पांच खरीदार देशों की समीक्षा करने और उनकी खरीद के आधार पर टैरिफ दरों में बदलाव की सिफारिश करने का भी प्रावधान किया गया है. यदि यह बिल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से भी पारित हो जाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और ऊर्जा आयात पर इसका असर पड़ सकता है.