केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी मिली है. सामने आया है कि उन्हें यह धमकी डाक के जरिए भेजी गई चिट्ठी में दी गई है. धमकी भरा पत्र मिलने के बाद चिराग पासवान की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. उनके ऑफिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह सचिव को चिट्ठी लिखकर इसकी जानकारी दी है और जरूरी एक्शन लेने के लिए मांग की है.
जानकारी के मुताबिक, चिराग पासवान को भेजी गई धमकी भरी चिट्ठी में अंग्रेजी में लिखा गया है, 'You will be killed shortly by hardcore Terrorists', यानी कट्टर आतंकवादियों द्वारा जल्द ही आपकी हत्या कर दी जाएगी.
धमकी भरा पत्र सामने आने के बाद चिराग पासवान के ऑफिस ने इसकी सूचना केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी है. कार्यालय की ओर से केंद्रीय गृह सचिव को लिखे गए पत्र में पूरे मामले की जानकारी देने के साथ ही आवश्यक सुरक्षा और कार्रवाई की मांग की गई है.
धमकी देने वाले की पहचान की कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान करने और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पत्र कहां से भेजा गया था. जांच में पत्र के स्रोत और इसे भेजने वाले शख्स से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि चिराग पासवान को धमकी देने के पीछे कौन है और पत्र भेजने का मकसद क्या था. मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित एजेंसियां धमकी से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं.
चिराग पासवान केंद्र सरकार में मंत्री होने के साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. धमकी मिलने के बाद उनकी सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को लेकर भी सतर्कता बढ़ गई है.
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आरक्षण के मुद्दे को लेकर चर्चा में हैं चिराग
बता दें कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आरक्षण के मुद्दे को लेकर चर्चा में हैं. आरक्षण में उप वर्गीकरण और 'क्रीमी लेयर' के मुद्दे पर चिराग़ पासवान और जीतन राम मांझी ने एक-दूसरे से इस्तीफ़ा देने की मांग की थी. चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी और बिहार सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष कुमार सुमन के इस्तीफ़े की मांग की थी.
चिराग का कहना था कि अगर मांझी और उनके बेटे अनुसूचित जाति आरक्षण के भीतर 'क्रीमी लेयर' लागू करने या उप-वर्गीकरण के पक्षधर हैं, तो आरक्षण का लाभ ले चुके होने के नाते उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद सबसे पहले केंद्रीय मंत्री पद और मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.