तरुण तेजपाल की सजा पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. इससे पहले पहले कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. तेजपाल की तरफ से अदालत को बताया गया कि उनके खिलाफ कोई और आपराधिक मामला नहीं है, यह उनका पहला अपराध है और 2013 की घटना के बाद से वह जमानत पर हैं. उनके वकील ने न्यूनतम सजा देने की मांग की और सरेंडर करने के लिए 8 हफ्ते का समय मांगा.
वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से अधिकतम सजा देने की मांग की. उनकी दलील थी कि तेजपाल पीड़िता के लिए पिता जैसी भूमिका में थे और घटना के दौरान पीड़िता की ओर से मना किए जाने के बावजूद अपराध दोहराया गया. अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि तेजपाल की तरफ से कोई पछतावा नहीं दिखा.
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तरुण तेजपाल को सजा सुनाते हुए कोर्ट ने क्या कहा?
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि घटना को 13 साल बीत चुके हैं. इस दौरान तेजपाल के खिलाफ किसी और गलत व्यवहार या ऐसी कोई दूसरी शिकायत की रिपोर्ट सामने नहीं आई. कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों पक्षों को अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए था.
इसके बाद अदालत ने अलग-अलग धाराओं के तहत सजा सुनाई. भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f) के तहत तेजपाल को 10 साल की कठोर कैद और 5 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया. धारा 376(2)(k) के तहत भी 10 साल की कठोर कैद और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई.
इसके अलावा धारा 354 के तहत एक साल की कठोर कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना, जबकि धारा 354A के तहत भी एक साल की कठोर कैद और जुर्माना लगाया गया. धारा 354B के तहत अदालत ने 3 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई.
2021 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
यह मामला 2013 का है, जब तहलका की एक जूनियर महिला कर्मचारी ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. तेजपाल ने आरोपों से इनकार किया था. गोवा की ट्रायल कोर्ट ने मई 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दोषी करार दिया और इसके बाद सजा पर सुनवाई की. तेजपाल की ओर से अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही गई है.