
लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास तंगधार, करनाह में 'ऑपरेशन दृष्टि' के तहत 220 लोगों की आंखों का सफल इलाज कर उनकी दृष्टि वापस लौटाने में मदद की गई है. यहां भारतीय सेना द्वारा 10वां मेगा आई सर्जिकल कैंप आयोजित किया गया.
इस कैंप में मुख्य रूप से मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) की सर्जरी के साथ-साथ सेलेक्टिव रेटिनल प्रोसीजर और मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी (MIGS) की गईं. बताया जा रहा है कि कैंप के दौरान इलाके में लगातार खतरा बना हुआ था, फिर भी सर्जरी एक अंडरग्राउंड ऑपरेशन थिएटर में की गईं.

करनाह शेलिंग-प्रोन इलाका माना जाता है, जिसने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान तीन दिनों में करीब 1,500 शेल झेले थे और हाल ही में यहां के एक फॉरवर्ड सर्जिकल सेंटर पर भी हमला हुआ था.
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मेडिकल टीम का नेतृत्व दिल्ली कैंटोनमेंट में आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) के ऑप्थल्मोलॉजी हेड ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा कर रहे थे. पहाड़ी इलाकों से होते हुए एडवांस्ड फैकोइमल्सीफिकेशन, विट्रियोरेटिनल और ग्लूकोमा उपकरण वहां पहुंचाए गए.
'रेडियो रूह-ए-करनाह' के जरिए चलाए गए स्क्रीनिंग और आउटरीच के बाद खवरपोरा, तंगधार, तड्ड, बागबेला, यंगर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचे.
यह कैंप सीमावर्ती गांवों के उन लोगों के लिए वरदान साबित हुआ, जिनकी जिंदगी कमजोर आंखों की वजह से काफी मुश्किल हो गई थी. गुलाम रब्बानी (87) ने मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद अपने परिवार और पोते-पोतियों को देख पाने की क्षमता वापस पा ली. वहीं 66 साल के मोहम्मद यूनिस अपनी आंखों की रोशनी लौटने के बाद फिर से काम पर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं.