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बृजभूषण बाइज्जत बरी, नाबालिग महिला पहलवान के एक कदम से पलट गया पूरा केस

अभियोजन पक्ष ने मई 2026 में अपने सबूत पेश करने से पहले सुनवाई के दौरान 32 गवाहों से पूछताछ की. जून में आरोपियों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद अंतिम बहस हुई, जो 2 जुलाई 2026 को पूरी हुई.

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एक बयान और पलट गया पूरा केस (Photo-ITG)
एक बयान और पलट गया पूरा केस (Photo-ITG)

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण सिंह को महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में राहत देते हुए बरी कर दिया है. अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. बृजभूषण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर चल रहे थे. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर अदालत ने 10 मई 2024 को उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसके बाद इस मामले का ट्रायल आधिकारिक रूप से शुरू हुआ था.

सिंह ने लगातार सभी आरोपों से इनकार किया था.,इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2023 की शुरुआत में हुई थी, जब देश के नामचीन और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला. पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया और उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की.

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद, अप्रैल 2023 में दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज कीं. इनमें से एक एफआईआर नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत दर्ज हुई थी, जबकि दूसरी एफआईआर अन्य बालिग महिला पहलवानों के गंभीर आरोपों पर आधारित थी.

यह भी पढ़ें: बृजभूषण सिंह बरी... महिला पहलवानों के यौन शोषण केस में कोर्ट से राहत

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नाबालिग गवाह का बयान वापस लेना और केस में नया मोड़

केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब नाबालिग पहलवान और उसके परिवार ने अपने शुरुआती आरोपों से पीछे हटने का फैसला किया. दिल्ली पुलिस ने अदालत में पेश की गई अपनी लगभग 550 पन्नों की रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पॉक्सो (POCSO) से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट से बृजभूषण शरण सिंह पर लगे पॉक्सो के मामले को रद्द करने की सिफारिश की. पुलिस की यह रिपोर्ट पूरी तरह से पीड़िता और उसके पिता द्वारा दोबारा दिए गए बयानों पर आधारित थी.

नाबालिग महिला पहलवान ने शुरू में बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे, बाद में नाबालिग ने यौन शोषण के आरोपों को वापस ले लिया. अपने नए बयान में उसने बताया कि कठिन परिश्रम के बावजूद जब उसका चयन नहीं हुआ, तो वह काफी निराश और मानसिक तनाव में थी. इसी गुस्से और पक्षपात के एहसास की वजह से उसने यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई थी. इसी बयान परिवर्तन और सबूतों की कमी के चलते पुलिस ने पॉक्सो मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की, जिसने पूरे केस की दिशा बृजभूषण शरण सिंह के पक्ष में मोड़ दी.

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सबूतों का अभाव और बरी होने का आधार

नाबालिग का मामला खत्म होने के बाद बालिग पहलवानों की शिकायत से जुड़े केस की सुनवाई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में जारी रही. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर बृजभूषण सिंह पर आरोप तय किए और ट्रायल की शुरुआत की. ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं. कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश करने में असमर्थ रहा. शिकायतकर्ताओं के बयानों में मौजूद विरोधाभास और सबूतों की कमी को आधार बनाते हुए अदालत ने उन्हें बरी करने का आदेश दिया.

यह भी पढ़ें: 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा'...बरी होने के बाद बृजभूषण की पहली प्रतिक्रिया

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