
बिहार के सासाराम में 1545 से खड़ा शेरशाह सूरी का मकबरा आज संरक्षण को लेकर सवालों के घेरे में है. 22 एकड़ की कृत्रिम झील के बीच बने इस 122 फीट ऊंचे लाल बलुआ पत्थर के मकबरे को लेकर इंडिया टुडे की RTI जांच में ASI के रिकॉर्ड से सामने आया है कि मकबरे के गुंबद से पत्थर टूटकर गिर चुका है, जबकि झील को पानी देने और बाहर निकालने वाली नहरों पर ASI का अधिकार नहीं है. वहीं, एजेंसी यह भी नहीं बता सकी कि झील के पानी की जांच कभी हुई है या नहीं.
ASI के पटना सर्किल की ओर से RTI के जवाब में मकबरे की संरचनात्मक स्थिति, तालाब के प्रबंधन और 2008 के पटना हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन से जुड़े सवालों की जानकारी दी गई है. रिकॉर्ड से पता चलता है कि स्मारक की सुरक्षा की जिम्मेदारी ASI के पास है, लेकिन उसके आसपास के पानी और नहरों को लेकर जिम्मेदारी का अंतर बना हुआ है.
9 अगस्त 2026 को शाम करीब 6 बजे मकबरे के मुख्य गुंबद के ऊपरी हिस्से से एक पत्थर टूटकर गिरा था. ASI के सासाराम सब-सर्किल की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे उस हिस्से को नुकसान पहुंचा. घटना की तस्वीरों में मकबरे के आधार के पास टूटे हुए पत्थर के टुकड़े दिखाई दिए. ASI के अनुसार, घटना में कोई पर्यटक घायल नहीं हुआ.
अतिक्रमण का शिकार
पानी की व्यवस्था को लेकर ASI ने बताया कि मकबरे की मूल योजना के अनुसार करीब 1.8 किलोमीटर लंबी इनलेट नहर सोन नदी की हाई लेवल नहर से कृत्रिम झील तक पानी लाती है, जबकि करीब 2.1 किलोमीटर लंबी आउटलेट नहर पानी बाहर निकालती है. समय के साथ दोनों नहरें जर्जर और अतिक्रमण का शिकार हो गईं. स्थानीय लोगों ने इन नहरों में अपने घरों की ड्रेनेज भी जोड़ दी, जिससे सीवरेज का पानी झील में जाने लगा और ठोस व तरल कचरे से पानी प्रदूषित होने लगा.

RTI में नहरों की सफाई, मरम्मत या गाद हटाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर ASI ने कहा कि ये नहरें उसके संरक्षण या अधिग्रहण में नहीं हैं, इसलिए विभाग इन्हें बनाए, मरम्मत, साफ या डी-सिल्ट नहीं कर सकता. वहीं, 2018 के बाद से पानी की गुणवत्ता की जांच को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में ASI ने सिर्फ ‘जानकारी उपलब्ध नहीं’ कहा.
ASI ने 14 सितंबर 2026 को रोहतास के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में प्रभाकर मोड़ के पास इनलेट नहर में स्थानीय दुकानदारों, नारियल विक्रेताओं और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरे के साथ आसपास के अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का भी जिक्र किया. पत्र में कहा गया कि बारिश के पानी के साथ यह कचरा नहर और टैंक में पहुंच सकता है, जिससे पानी की गुणवत्ता और मछलियों पर असर पड़ सकता है.
सफाई पर ध्यान दिया जा रहा
रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने कहा कि सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि शेरशाह के तालाब में साफ पानी लाने के लिए जल संसाधन विभाग बेदा नहर से पानी पहुंचाने की नई परियोजना तैयार करेगा. उन्होंने कहा कि मकबरे और इनलेट नहर के आसपास डाले जा रहे मेडिकल वेस्ट और कचरे की जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर जुर्माना लगाया जाएगा.
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि तालाब का पानी फिलहाल स्थिर है और ठीक से शुद्ध या सर्कुलेट नहीं हो रहा है. इसे ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने परियोजना तैयार की है, जिसका कार्यान्वयन चल रहा है. परियोजना पूरी होने के बाद तालाब का पानी नियमित रूप से बदला जाएगा. जिलाधिकारी के मुताबिक, मकबरे की सीमा और अंदर के कुछ हिस्से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ पत्थर टूट रहे हैं.