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जंगलों की 'आयरन लेडी' अब CoBRA की बॉस, संजुक्ता पराशर को मिली बड़ी जिम्मेदारी

CRPF की विशेष कमांडो यूनिट CoBRA के नए Inspector General के रूप में संजुक्ता पराशर की नियुक्ति हुई है. उनका करियर उग्रवाद विरोधी अभियानों और मुश्किल ऑपरेशनों के लिए जाना जाता है. असम की 'आयरन लेडी' के नाम से जानी जाने वाली संजुक्ता पराशर ने नक्सल प्रभावित इलाकों में फील्ड ऑपरेशन का शानदार अनुभव हासिल किया है.

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संजुक्ता पराशर को असम की 'आयरन लेडी' कहा जाता है. (Photo- ITGD)
संजुक्ता पराशर को असम की 'आयरन लेडी' कहा जाता है. (Photo- ITGD)

जंगलों की खामोशी को पढ़ना, दुर्गम इलाकों में छिपे खतरे को भांपना और हथियारबंद उग्रवादियों के खिलाफ मोर्चे पर नेतृत्व करना- ये सामान्य पुलिसिंग से बिल्कुल अलग चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए बनाई गई CRPF की विशेष कमांडो यूनिट CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) को अब ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसका अपना करियर ही उग्रवाद विरोधी अभियानों और मुश्किल ऑपरेशनल परिस्थितियों से जुड़ा रहा है.

2006 बैच की IPS अधिकारी डॉ. संजुक्ता पराशर को CRPF में Inspector General (IG) नियुक्त किया गया है. असम की 'आयरन लेडी' के नाम से पहचानी जाने वाली संजुक्ता पराशर की ये नियुक्ति इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उनका पुराना ऑपरेशनल अनुभव CoBRA की मूल भूमिका-जंगल और गुरिल्ला वारफेयर से सीधा जुड़ता है.

अगस्त 2026 में उनकी CRPF में IG के तौर पर नियुक्ति की जानकारी सामने आई थी. ये सिर्फ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की नई पोस्टिंग नहीं है. इसे उस दौर में अहम माना जा रहा है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप बदल रहा है और जंगल, पहाड़, सीमावर्ती इलाके तथा हथियारबंद समूहों के खिलाफ ऑपरेशन में स्पेशल ट्रेनिंग वाली फोर्स की भूमिका बढ़ रही है.

फोर्स का नाम ही 'Resolute Action' है

CoBRA CRPF की सबसे खास ऑपरेशनल यूनिट्स में से एक है. इसका पूरा नाम Commando Battalion for Resolute Action है. नाम में शामिल 'Resolute Action' यानी दृढ़ और निर्णायक कार्रवाई ही इस यूनिट की कार्यप्रणाली को परिभाषित करती है. CoBRA को खास तौर पर गुरिल्ला और जंगल वारफेयर के लिए तैयार किया गया है.

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घने जंगलों में लंबी दूरी तक पैदल ऑपरेशन, कठिन भूभाग में मूवमेंट, एंबुश और काउंटर-एंबुश, IED के खतरे से निपटना, खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई और हथियारबंद उग्रवादियों के खिलाफ सटीक ऑपरेशन- ये इसकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं. नक्सल विरोधी अभियानों में CoBRA कमांडोज की भूमिका लंबे समय से अहम रही है.

छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे इलाकों में इस फोर्स ने ऐसे भूभाग में ऑपरेशन किए हैं जहां सामान्य सिक्योरिटी सिस्टम के लिए भी लगातार चुनौती बनी रहती है. यही वजह है कि CoBRA की कमान किसी ऐसे अधिकारी को मिलना, जिसने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही उग्रवाद प्रभावित इलाके में ऑपरेशनल लीडरशिप का अनुभव हासिल किया हो, अपने आप में अहम है.

संजुक्ता पराशर की कहानी यहीं से जुड़ती है

संजुक्ता पराशर की पहचान किसी ऑफिस में बैठकर प्रशासनिक फैसले लेने वाली अधिकारी की नहीं रही है. असम में उनकी शुरुआती पोस्टिंग के दौरान उन्हें उग्रवाद प्रभावित इलाकों में काम करने का मौका मिला. घने जंगल, हथियारबंद उग्रवादी, लगातार बदलती परिस्थितियां और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती- इन सबके बीच संजुक्ता पराशर ने फील्ड ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई.

यही वो दौर था जिसने उन्हें देशभर में अलग पहचान दी. हथियारबंद उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में उनकी सक्रियता और फील्ड लीडरशिप के चलते उनकी इमेज एक ऐसी अधिकारी की बनी जो चुनौती से पीछे हटने के बजाय उसे सीधे स्वीकार करती हैं. इसी पृष्ठभूमि के कारण उन्हें 'आयरन लेडी ऑफ असम' कहा गया. 

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अब गौर करने वाली बात ये है कि जिस अधिकारी की पहचान असम के जंगलों में उग्रवाद विरोधी कार्रवाई से बनी, वही अधिकारी देश की एक प्रमुख जंगल-वारफेयर फोर्स की IG बनी हैं. यानी संजुक्ता पराशर के करियर और CoBRA की ऑपरेशनल जरूरतों के बीच एक स्वाभाविक समानता दिखाई देती है.

JNU से पढ़ाई, UPSC में शानदार प्रदर्शन

संजुक्ता पराशर का प्रोफेशनल सफर सिर्फ फील्ड ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की और इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल रिलेशंस में उच्च शिक्षा हासिल की. साल 2006 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 85 हासिल की और IPS चुना. यहां भी उनकी पसंद अहम थी.

प्रशासनिक सेवा की जगह उन्होंने पुलिस सेवा को प्राथमिकता दी. बाद के सालों में उनके करियर ने ये साबित भी किया कि उन्होंने जिस फील्ड-ओरिएंटेड भूमिका को चुना था, उसमें उन्होंने खुद को स्थापित किया.

NIA का अनुभव भी बनेगा ताकत

संजुक्ता पराशर के करियर में एक और अहम चैप्टर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA का रहा है. NIA में DIG के तौर पर काम करने का अनुभव उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े नेटवर्क को समझने और कई एजेंसियों के साथ तालमेल की व्यापक समझ देता है. यानी अब उनके पास दो अलग-अलग तरह के अनुभव हैं- एक तरफ ग्राउंड ऑपरेशन, दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा जांच और इंटेलिजेंस-आधारित काम.

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CoBRA जैसी फोर्स के लिए ये संयोजन खास अहमियत रखता है. क्योंकि एडवांस सिक्योरिटी अभियानों में सिर्फ हथियार और कमांडो पर्याप्त नहीं होते. किसी ऑपरेशन की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि सुरक्षा बलों के पास कितनी सटीक सूचना है, उस सूचना को किस तरह ऑपरेशन में बदला जाता है और ऑपरेशन के दौरान हालात के बदलने पर कितनी तेजी से रणनीति बदली जाती है.

CoBRA के लिए नई चुनौती सिर्फ नक्सलवाद नहीं

CoBRA की पहचान लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़ी रही है. लेकिन अब इसकी ऑपरेशनल भूमिका का दायरा बदलता दिखाई दे रहा है. मणिपुर में CoBRA की तैनाती इसका एक बड़ा उदाहरण है. यहां सुरक्षा बलों के सामने जंगल और पहाड़ी भूभाग के साथ-साथ हथियारबंद समूहों, संवेदनशील सामाजिक परिस्थितियों और चुनौतियों से भरे सुरक्षा वातावरण का मिश्रण है. 

ऐसे इलाके में ऑपरेशन का मतलब सिर्फ दुश्मन की तलाश नहीं है. जवानों को इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय संवेदनशीलता और जमीनी खुफिया जानकारी को साथ लेकर आगे बढ़ना होता है. इसलिए CoBRA की भूमिका अब एक पारंपरिक एंटी-नक्सल फोर्स से आगे बढ़कर स्पेशलाइज्ड जंगल और कठिन भूभाग ऑपरेशन फोर्स के रूप में देखी जा सकती है.

जम्मू-कश्मीर में भी हो सकता है विशेषज्ञता का इस्तेमाल?

सुरक्षा हलकों में इस बात की चर्चा भी है कि जंगल वारफेयर में प्रशिक्षित CoBRA कमांडोज की विशेषज्ञता जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में फायदेमंद हो सकती है जहां घने जंगल और पहाड़ी भूभाग आतंकवाद विरोधी अभियानों को मुश्किल बनाते हैं. खास तौर पर जम्मू क्षेत्र में जंगल, पहाड़ और सीमावर्ती इलाकों का संयोजन सुरक्षा बलों के लिए अलग तरह की चुनौती पैदा करता है.

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हालांकि जम्मू के किसी विशेष इलाके में CoBRA की तैनाती को लेकर फिलहाल किसी संभावित चर्चा को आधिकारिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. लेकिन अगर भविष्य में ऐसे इलाकों में CoBRA की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाता है तो संजुक्ता पराशर का अनुभव निश्चित तौर पर अहम हो सकता है. क्योंकि उनका करियर खुद ऐसे ऑपरेशनल वातावरण से जुड़ा रहा है जहां जंगल, उग्रवाद और फील्ड लीडरशिप एक साथ मौजूद थे.

क्यों अहम है एक महिला अधिकारी का CoBRA नेतृत्व?

संजुक्ता पराशर की नियुक्ति का एक दूसरा अहम पहलू भी है।. CoBRA जैसे ऑपरेशनल और मुश्किल फील्ड रोल वाली फोर्स में एक महिला IPS अधिकारी का IG स्तर पर नेतृत्व करना सुरक्षा बलों में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को दिखाता है. 

पिछले कुछ सालों में CAPFs में महिलाओं की भूमिका लगातार विस्तृत हुई है. अब महिला अधिकारी सिर्फ प्रशासनिक या पारंपरिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑपरेशनल और कमांड स्तर पर भी अहम जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. संजुक्ता पराशर की नियुक्ति इसी बदलाव की एक मजबूत मिसाल है.

'आयरन लेडी' की छवि से आगे की चुनौती

हालांकि संजुक्ता पराशर की पुरानी छवि बेहद मजबूत है, लेकिन CoBRA की कमान संभालना अपने आप में नई चुनौती है. यहां उनके सामने सिर्फ ऑपरेशनल सफलता का सवाल नहीं होगा. कमांडो यूनिट की ट्रेनिंग, ऑपरेशनल रेडीनेस, इंटेलिजेंस को फील्ड एक्शन में बदलना, अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय और बदलते सुरक्षा वातावरण के मुताबिक फोर्स को तैयार रखना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी.

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यह भी पढ़ें: 3 गोलियां खाकर भी आतंकी को मार गिराया, CRPF कमांडो संजय तिवारी का हुआ ग्रैंड वेलकम

CoBRA के जवानों को ऐसे इलाकों में भेजा जाता है जहां एक छोटी-सी चूक भी भारी पड़ सकती है. इसलिए कमांड स्तर पर फैसले लेने की रफ्तार और सटीकता बेहद अहम होती हैय संजुक्ता पराशर का अब तक का करियर बताता है कि वो फील्ड की चुनौतियों से परिचित हैं.

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