केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के दबाव में इस्तीफा नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पारदर्शी मतदाता सूची का विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध करने के बराबर है.
अठावले ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है और उसे पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
आरपीआई (ए) प्रमुख ने कहा, 'चुनाव आयोग एक संवैधानिक रूप से स्वतंत्र संस्था है. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करना और पारदर्शी मतदाता सूची का विरोध करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध है.' उनकी पार्टी बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा है.
इस्तीफा नहीं देना चाहिए
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को विपक्ष के दबाव में इस्तीफा नहीं देना चाहिए. अठावले ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयुक्तों के बीच कोई मतभेद नहीं है. कांग्रेस और कई अन्य दलों ने हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में कम से कम 14 बार विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर औपचारिक आपत्ति जताई थी.
इस मामले में जांच की मांग
चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा था कि तीन सदस्यीय आयोग ने मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े फैसलों समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए हैं. अठावले ने कहा कि पारदर्शी चुनाव के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण जरूरी है और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाने चाहिए. सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री ने उन मामलों की जांच की भी मांग की, जहां एक छोटे से घर में 40 से ज्यादा मतदाता पंजीकृत हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी पर निशाना
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए अठावले ने कहा कि पार्टी को अपना नाम बदलकर ‘राजीनामा जनता पार्टी’ कर लेना चाहिए, क्योंकि उसने इससे पहले तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की थी. अठावले ने कहा, 'हर बार किसी के इस्तीफे की मांग करना सही नहीं है.'