अयोध्या में श्री राम मंदिर की व्यवस्था चलाने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास में चंदा चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा की याचिका भी शामिल है, जिसमें ट्रस्ट के आय-व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कराने की गुहार लगाई गई है. सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ इस मामले पर भी सुनवाई करेगी.
निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रस्ट के आय-व्यय का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित करने और रामानंदी परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ बहाल करने का आदेश देने की मांग की है.
रामानंदी संप्रदाय की मूल परंपरा से हो पूजा
अखाड़े ने अपनी अर्जी में चंदा और चढ़ावा चोरी के आरोपों के बीच अखाड़े ने सभी वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच की मांग की है. मौजूदा ट्रस्ट को प्राइवेट बॉडी बताते हुए इसे एक सार्वजनिक (पब्लिक) ट्रस्ट में बदलने की अपील भी याचिका में की गई है. मंदिर के सभी अनुष्ठान और पूजा-सेवा रामानंदी संप्रदाय की मूल परंपरा के अनुसार, चलाने का निर्देश देने की मांग याचिका में है. अखाड़े ने मंदिर में 1950 और 1982 से स्थापित मूल विग्रहों को पुनः स्थापित करने की मांग भी की गई है. निर्मोही अखाड़ा ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
7 साल में निर्देशों का पालन नहीं
अखाड़े की दलील है कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की विशिष्ट पीठ के निर्णय को 7 साल होने को आ गए हैं, लेकिन अब तक कोर्ट के उन निर्देशों का सही अर्थों में पालन नहीं हुआ है, जिन अर्थों में वो आदेश पारित किए गए थे.
अखाड़ें की अर्जी में आरोप है कि वर्तमान ट्रस्ट कुछ नामित और पदेन सदस्यों वाला ऐसा निकाय बन गया है जो सार्वजनिक धार्मिक न्यास की संपत्तियों पर बिना पर्याप्त जवाबदेही के अधिकारों का प्रयोग कर रहा है.
हाल ही में राम मंदिर में श्रद्धालुओं से दान भेंट में मिली बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों का भी जिक्र अर्जी में है. अखाड़े का कहना है कि इन आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच दल(SIT) का गठन किया गया, इसलिए ट्रस्ट के वित्तीय और संपत्ति संबंधी लेनदेन की फोरेंसिक जांच जरूरी है.