सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा न होने की बात कहते हुए मांग की है कि वांगचुक को तुरंत किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इलाज के नाम पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है.
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में गीतांजलि ने कहा है कि सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अपने अनिश्चितकालीन अनशन के 21वें दिन थे, जब उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. उनका कहना है कि अस्पताल में उन्हें परिवार, वकीलों और पिछले 20 दिनों से स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे डॉक्टरों से भी अलग रखा गया है.
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याचिका में अदालत से मांग की गई है कि वांगचुक की मौजूदा हिरासत को असंवैधानिक और अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन घोषित किया जाए. साथ ही उन्हें तत्काल अस्पताल से रिहा करने या परिवार की पसंद के अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया जाए.
सोनम वांगचुक की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
गीतांजलि आंग्मो ने सोशल मीडिया पर भी अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि अस्पताल ने परिवार को बताया था कि वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर घटकर 2.9 रह गया है, जिसे जानलेवा बताया गया. लेकिन सार्वजनिक हेल्थ बुलेटिन में यह आंकड़ा नहीं बताया गया और सिर्फ "पोटैशियम का स्तर घट रहा है" लिखकर छोड़ दिया गया.
सोनम वांगचुक की पत्नी ने दावा किया कि कई घंटों की मांग के बाद रात करीब 10:30 बजे परिवार को स्वतंत्र लैब में ब्लड सैंपल जांच कराने की अनुमति मिली, जहां रिपोर्ट में पोटैशियम का स्तर 3.5 आया, जो सामान्य सीमा में माना जाता है. इसी आधार पर उन्होंने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं.
सोनम वांगचुक को डिस्चार्ज नहीं कर रहा अस्पताल!
गीतांजलि का आरोप है कि परिवार की बार-बार मांग के बावजूद अस्पताल प्रशासन वांगचुक को डिस्चार्ज नहीं कर रहा और न ही किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दे रहा है. उन्होंने कहा कि अस्पताल की मंजिल पर करीब 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल में 100 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिससे परिवार की आवाजाही भी सीमित कर दी गई है.
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उन्होंने कहा, "यह चिकित्सा नहीं, बल्कि अवैध हिरासत है. अगर सोनम वांगचुक को कुछ भी होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और सरकार की होगी."
अब इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई है. अदालत के फैसले पर ही तय होगा कि वांगचुक सफदरजंग अस्पताल में ही रहेंगे या उन्हें किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति मिलेगी.