प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस दौरान कृषि और ग्रामीण विकास में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के साथ भारत की साझेदारी पर चर्चा की गई. प्रिंस रहीम आगा खान पंचम उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के निमंत्रण पर भारत के दौरे पर हैं, जिसमें वे दिल्ली के बाद अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद जाएंगे.
पीएम मोदी ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा कि प्रिंस रहीम आगा खान पंचम से मिलकर खुशी हुई. साथ ही उन्होंने उनके पिता स्वर्गीय आगा खान और विकास कार्यों में उनके अहम योगदान को याद किया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ग्रामीण विकास, युवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के साथ हमारी साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई.
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम शिया निज़ारी इस्माइली मुसलमानों के 50वें वंशानुगत इमाम और वैश्विक परोपकारी संस्था आगा खान विकास नेटवर्क (AKDN) के अध्यक्ष हैं. आगा खान फाउंडेशन और आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर भारत में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के क्षेत्र में काम करते हैं.
कौन हैं प्रिंस रहीम आगा खान पंचम?
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम इस्माइली मुस्लिम समुदाय के 50वें इमाम (आध्यात्मिक नेता) हैं. वह आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क (एकेडीएन) के चेयरमैन हैं. प्रिंस रहीम आगा खान का जन्म 12 अक्टूबर 1971 को जेनेवा, स्विट्जरलैंड में हुआ था. उनके पिता का नाम प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ (49वें इमाम) और मां का नाम सलीमा आगा खान है.
रहीम आगा खान की शुरुआती शिक्षा अमेरिका की फिलिप्स अकादमी एंडोवर में हुई. इसके बाद उन्होंने 1995 में ब्राउन यूनिवर्सिटी से स्नातक किया और स्पेन के प्रतिष्ठित IESE बिजनेस स्कूल से प्रबंधन एवं प्रशासन का अध्ययन किया.
वर्ष 2013 में उनका विवाह केंड्रा स्पीयर्स (प्रिंसेस सलवा) से हुआ था, लेकिन 2022 में तलाक हो गया. प्रिंस रहीम आगा खान के दो बेटे हैं, जिनमें एक प्रिंस इरफान और दूसरे बेटे का नाम प्रिंस सिनान है.
1.5 करोड़ मुसलमानों के रहनुमा प्रिंस रहीम
प्रिंस रहीम आगा खान पंचम मुस्लिम समुदाय के तहत आने वाले इस्माइली संप्रदाय के आध्यात्मिक नेता हैं, जो अपने पिता के निधन के बाद 4 फरवरी 2025 को इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम बने. वह दुनिया भर में फैले लगभग 1.5 करोड़ इस्माइली मुसलमानों का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करते हैं.
निज़ारी इस्माइलिया, शिया इस्लाम के भीतर इस्माइलिया संप्रदाय की एक शाखा है. इसके पूरी दुनिया में करीब 1.5 करोड़ अनुयायी माने जाते हैं. अपने पिता आगा खान चतुर्थ के निधन के बाद एक वसीयत के जरिए फरवरी 2025 में प्रिंस रहीम आगा खान को इमाम नियुक्त किया गया है. आगा खान पंचम स्विट्जरलैंड के जेनेवा में रहते हैं.
इस्माइली मुस्लिम शिया कौन होते हैं?
इस्माइली संप्रदाय शिया मुसलमानों का एक समूह है. इस संप्रदाय के लोग पैगंबर मोहम्मद साहब को मानते हैं. इस्माइली समुदाय के लोग अली इब्न अबी तालिब को पहला इमाम मानते हैं. इमाम, इस्माइली समुदाय का मुखिया होता है. इस समुदाय के लोग छठे इमाम जाफ़र अस-सादिक के बेटे इस्माइल बिन जाफ़र के अनुयायी हैं.
इस्माइली संप्रदाय का उदय सन् 765 में जाफर अल-सादिक के उत्तराधिकारी पर उपजी असहमति के बाद हुआ. इस संप्रदाय को मानने वाले लोगों ने तब इमाम जाफर अल-सादिक के उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे इस्माइल को चुना था. उनके नाम पर ही इस्माइली संप्रदाय नाम पड़ा.
इस्माइल के बाद उनके बेटे मोहम्मद और बाद की संतानों के माध्यम से संप्रदाय ने 'इमामत' की परंपरा को जारी रखा. (वहीं दूसरी ओर, 12 इमामों को मानने वाला समूह इस्माइल के भाई मूसा अल-काज़िम का अनुयायी बना). भारत में इस्माइली संप्रदाय की दो प्रमुख शाखाएं मुस्तली (बोहरा) और निज़ारी (खोजा) हैं.
न रोजा रखते और न ही नमाज पढ़ते
इस्माइली मुस्लिम समुदाय के लोग 25 से अधिक अलग-अलग देशों में रहते हैं. ये मुख्य रूप से मध्य और दक्षिण एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं. इस वक्त पूरी दुनिया में इस्माइली मुस्लिम समुदाय के लोगों की जनसंख्या 1.5 करोड़ के करीब है.
ये लोग मुसलमानों के अन्य संप्रदायों से अलग हैं. ये लोग न तो 5 बार नमाज पढ़ते हैं और न ही रमज़ान के दौरान रोज़ा रखते हैं. ये लोग हज पर भी नहीं जाते, और यह संप्रदाय राजनीतिक विवादों से भी दूर रहता है. आगा खान के अनुयायी उन्हें पैगंबर मोहम्मद का वंशज मानते हैं.
आगा खान फाउंडेशन क्या काम करता है?
आगा खान फाउंडेशन और आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने भारत में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कार्य किए हैं. उनका मुख्य ध्यान केवल इमारतों को बचाने पर ही नहीं, बल्कि उनके आसपास के सामाजिक और आर्थिक वातावरण को सुधारने पर भी रहता है. AKDN के माध्यम से वे वैश्विक स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, गरीबी उन्मूलन और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की परियोजनाओं का नेतृत्व करते हैं.
आगा खान फाउंडेशन पूर्वी अफ्रीका तथा अफगानिस्तान में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, आर्थिक विकास और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में काम करता है. हुमायूं के मकबरे का संरक्षण, भारत में किसी विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण का पहला प्रमुख सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल था.
आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ मिलकर 16वीं शताब्दी के इस भव्य मुगल मकबरे और उसके मुगल बागों का पूर्ण जीर्णोद्धार किया. फाउंडेशन हैदराबाद में गोलकुंडा के शासकों के ऐतिहासिक कुतुब शाही मकबरों और उनके परिसरों के विशाल जीर्णोद्धार कार्य में लगा हुआ है. पुणे का ऐतिहासिक आगा खान पैलेस, जिसे 1892 में आगा खान तृतीय ने बनवाया था, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.
आगा खान फाउंडेशन की धरोहर परियोजनाओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे संरक्षण कार्य में स्थानीय कारीगरों, राजमिस्त्रियों और शिल्पकारों को शामिल करते हैं, जिससे पारंपरिक हस्तकलाओं को जीवित रखा जाता है. आगा खान फाउंडेशन का यह योगदान भारत की समृद्ध वास्तुकला, इतिहास और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.