scorecardresearch
 

अब हर साल होगा सभी पायलटों का डोप टेस्ट? DGCA ने शुरू की तैयारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय सभी पायलटों का साल में एक बार डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. DGCA इसको लेकर संबंधित पक्षों से चर्चा कर रहा है और इसके संचालन पर पड़ने वाले असर की भी समीक्षा की जा रही है.

Advertisement
X
एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त है. (Photo- सांकेतिक तस्वीर)
एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त है. (Photo- सांकेतिक तस्वीर)

नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. मंत्रालय सभी पायलटों का साल में एक बार अनिवार्य डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ाने वाले पायलट किसी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी पर न हों.

इस प्रस्ताव को लेकर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा कर रहा है. अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि सभी पायलटों का सालाना 100 फीसदी डोप टेस्ट कराना कितना व्यावहारिक होगा.

यह भी पढ़ें: वो खौफनाक 7 सेकंड... जरा सी चूक से हो जाता बड़ा हादसा! एअर इंडिया प्लेन टर्बुलेंस केस में नया खुलासा

इसके साथ ही प्रस्तावित व्यवस्था का एयरलाइन ऑपरेशंस पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जा रहा है. अधिकारियों का फोकस यह तय करने पर है कि डोप टेस्ट की प्रक्रिया लागू होने के बावजूद उड़ानों के संचालन में किसी तरह की परेशानी न आए. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पायलटों की नियमित जांच के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

Advertisement

एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA सख्त

एअर इंडिया की फ्लाइट AI2379 के 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे गिरने की घटना के बाद नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने विमान सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इस घटना में 24 लोग घायल हुए थे. मामले की जांच के दौरान पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है और तकनीकी गड़बड़ियों के साथ-साथ क्रू के मेडिकल टेस्ट की भी जांच की जा रही है.

घटना के बाद कराए गए कन्फर्मेटरी मेडिकल टेस्ट में विमान के कैप्टन के मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा फ्लाइट के अचानक ऊंचाई खोने से पहले हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से जुड़े कई तकनीकी अलर्ट भी दर्ज हुए थे. DGCA अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है.

DGCA लगातार एक्शन मोड में

इस घटना ने विमान उड़ाने वाले पायलट की नियमित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. इसी के बाद DGCA कमर्शियल एयरलाइंस में साइकोएक्टिव और नशीले पदार्थों की जांच के नियमों को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है.

यह भी पढ़ें: हवा में यात्रियों की जान खतरे में, पायलटों के डोप टेस्ट पर एअर इंडिया को सरकार से क्या नसीहत मिली

Advertisement

नए नियमों के तहत पायलटों और अन्य फ्लाइट क्रू की रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है. DGCA यह भी देख रहा है कि ड्रग टेस्टिंग को ज्यादा प्रभावी और नियमित कैसे बनाया जाए, ताकि किसी भी तरह के नशे के प्रभाव में कोई क्रू सदस्य विमान संचालन का हिस्सा न बन सके.

यानी एअर इंडिया की घटना के बाद DGCA अब सिर्फ इस मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की तैयारी में है. मकसद साफ है- पायलटों की फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement