प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विपक्ष के लिए 'नाराज फूफा' वाले बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पलटवार किया है. चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि वह 'बेवकूफ नक्सल' नहीं, बल्कि 'दिमागी नक्सल' हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले नारों और शब्दों पर भी निशाना साधा. दिल्ली में पी. चिदंबरम ने कहा, "मुझे खुशी है कि मैं बेवकूफ नक्सल नहीं हूं. मुझे खुशी है कि मैं दिमागी नक्सल हूं."
चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों और उनके नारों का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी खुद को कवि बताते हैं और गुजराती में कविताएं लिखते हैं. उन्होंने कहा, टमुझे लगता है कि वह इन शब्दों को गुजराती में गढ़ते हैं और फिर उनका अंग्रेजी में अनुवाद करते हैं. मैंने अंग्रेजी अनुवाद पढ़ा है, लेकिन यह उनका अपना तरीका है.'
'12 साल में 20-25 नारे दिए'
चिदंबरम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 'अच्छे दिन आने वाले हैं' से इसकी शुरुआत की थी. उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी ने करीब 20 से 25 नारे गढ़े हैं और अब इसमें दो नए शब्द 'दिमागी नक्सल' और 'नाराज फूफा' जुड़ गए हैं. कांग्रेस नेता ने कहा, 'कल वह कुछ और कहेंगे. BRICS समिट में कुछ और कहेंगे. लेकिन इनका कोई अर्थ नहीं है.'
चिदंबरम ने दावा किया कि 'नाराज फूफा' और 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों को लेकर Gen Z ने सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में मीम बनाए हैं.
उन्होंने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया. चिदंबरम ने कहा कि जब उन्होंने ट्वीट किया कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है तो उसे 55 लाख लाइक्स मिले. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि वे सभी खुद को दिमागी नक्सल मानते हैं या नहीं, लेकिन कम से कम उनमें से बड़ी संख्या ने उस ट्वीट को पसंद किया. इसका मतलब है कि वे भी दिमागी नक्सल हैं.'
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में विपक्ष पर निशाना साधते हुए 'नाराज फूफा' शब्द का इस्तेमाल किया था. इसी टिप्पणी को लेकर अब कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी पर तंज कसा है और उनके राजनीतिक नारों तथा भाषणों में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को लेकर सवाल उठाए हैं.