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PM मोदी के दिवाली सेलिब्रेशन का लोकेशन अचानक तय नहीं होता, जानें क्यों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 12 वर्षों तक सियाचिन से आईएनएस विक्रांत तक अलग-अलग मोर्चों पर सैनिकों के साथ दिवाली मनाई. इन ठिकानों का चुनाव उस समय की सीमा और सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ा रहा, जबकि हर दौरे में जवानों के सम्मान और सैन्य एकजुटता का संदेश सामने आया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में राजौरी के नौशेरा सेक्टर में जवानों संग दिवाली मनाई थी. (File Photo)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में राजौरी के नौशेरा सेक्टर में जवानों संग दिवाली मनाई थी. (File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवाली की लोकेशन कभी महज एक जगह का चुनाव नहीं रही. 2014 में सियाचिन से शुरू हुआ यह सिलसिला 2025 में स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत तक पहुंचा. लगातार 12 साल से पीएम मोदी दिवाली देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के साथ मना रहे हैं. इन 12 सालों में उन्होंने पाकिस्तान और चीन की सीमाओं से लेकर गुजरात के क्रीक और अरब सागर तक का सफर किया है. उनकी इन जगहों को देखें तो पिछले एक दशक में भारत के सामने आई सुरक्षा चुनौतियों की कहानी भी सामने आती है.

23 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली दिवाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सियाचिन बेस कैंप पहुंचे थे. इससे कुछ हफ्ते पहले ही चीनी सैनिकों ने लद्दाख के चुमार इलाके में घुसपैठ की थी. उस वक्त चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर थे. जवानों के बीच पहुंचकर मोदी ने संदेश दिया था कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है.

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2015 में उन्होंने पंजाब के डोगराई, बरकी और असल उत्तर युद्ध स्मारकों पर दिवाली मनाई. यह 1965 की जंग के 50 साल पूरे होने का मौका था. 2016 में उरी हमले और एलओसी पार सर्जिकल स्ट्राइक के कुछ हफ्ते बाद पीएम मोदी हिमाचल प्रदेश के सुमदो पहुंचे. यह चीन सीमा के करीब है. इसके बाद 2017 में उन्होंने एलओसी के संवेदनशील इलाके गुरेज घाटी और 2018 में उत्तराखंड के हर्षिल में जवानों के साथ दिवाली मनाई. हर्षिल में सेना के साथ आईटीबीपी के जवान भी तैनात थे.

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पाकिस्तान और चीन को दिया संदेश

2019 में पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर के राजौरी पहुंचे. यह अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तीन महीने बाद का वक्त था. इसी दिन इन्फैंट्री डे भी था. इसके बाद वह पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन भी गए, जिस पर जनवरी 2016 में आतंकियों ने हमला किया था.

2020 में उन्होंने राजस्थान के लोंगेवाला में दिवाली मनाई. उस वक्त गलवान झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव जारी था. इससे एक दिन पहले पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच सैनिक थे. मोदी ने चीन का नाम लिए बिना विस्तारवाद को मानसिक बीमारी बताया और पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत उकसाए जाने पर करारा जवाब देगा.

2021 में वह नौशेरा पहुंचे और 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक में ब्रिगेड की भूमिका को याद किया. 2022 में कारगिल में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का संदेश दिया. उन्होंने कहा था कि दिवाली आतंक के अंत का त्योहार है. 2023 में मोदी हिमाचल प्रदेश के लेपचा पहुंचे. उस समय भारत और चीन के बीच एलएसी पर कई मुद्दों को लेकर बातचीत जारी थी.

सीमा से समंदर तक पहुंची दिवाली

2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के सर क्रीक में लक्की नाला पर जवानों के साथ दिवाली मनाई. यह गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच स्थित ज्वारीय क्षेत्र है. वहां उन्होंने सेना के तीनों अंगों और बीएसएफ के जवानों से मुलाकात की. इसी दिवाली भारत और चीन के सैनिकों ने देपसांग और डेमचोक में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एलएसी पर मिठाइयों का आदान-प्रदान भी किया.

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2025 में पीएम मोदी ने गोवा और करवार के तट के पास INS विक्रांत पर दिवाली मनाई. यह भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह मौका ऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीने बाद आया था. उस ऑपरेशन के दौरान नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में अपना कैरियर बैटल ग्रुप तैनात किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की तारीफ की और कहा कि उनकी ताकत ने पाकिस्तान को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था.

इस तरह पीएम मोदी ने 12 साल में देश के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्र में जवानों के साथ दिवाली मनाई. सियाचिन के ग्लेशियर से लेकर INS विक्रांत के डेक तक उनकी यह यात्रा सिर्फ त्योहार मनाने का सिलसिला नहीं रही, बल्कि हर बार देश की सुरक्षा और सेना के साथ खड़े होने का संदेश भी देती रही है.

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