देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार इस समय लगभग थम गई है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मॉनसून की उत्तरी सीमा दोनों छोर पर स्थिर बनी हुई है. पश्चिमी छोर 8 जून से महाराष्ट्र के हरनाई पर अटका हुआ है, जबकि पूर्वी सीमा बिहार के मुजफ्फरपुर तक ही सीमित है. इसके आगे मॉनसून का कोई खास विस्तार नहीं हो पाया है.
बारिश की भारी कमी से बढ़ी चिंता
स्काईमेट के मुताबिक, देश के करीब 66% हिस्से में या तो बारिश की कमी है या गंभीर सूखा जैसी स्थिति बन रही है. सबसे ज्यादा असर मध्य भारत में देखा जा रहा है, जहां बारिश की कमी 70% से 80% तक पहुंच चुकी है. मध्य क्षेत्र के सभी मौसम उप-मंडलों में मॉनसून की भारी कमी दर्ज की गई है.
उत्तर-पश्चिम भारत में कुछ राहत
पश्चिमी विक्षोभ और ऊपरी वायुमंडलीय सिस्टम के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में कुछ समय-समय पर बारिश होती रही है, जिससे वहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है. हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी अब बारिश की कमी का असर दिखने लगा है.
जून के अंत तक स्थिति और बिगड़ने की आशंका
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जून महीने में बारिश की कमी 40% से 50% तक पहुंच सकती है. यह स्थिति कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकती है, क्योंकि खरीफ सीजन की बुआई सीधे मॉनसून पर निर्भर करती है.
समुद्री सिस्टम नहीं बनने से रुकी रफ्तार
आमतौर पर मॉनसून को आगे बढ़ाने में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन इस समय दोनों क्षेत्रों में कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं हुई है. यही वजह है कि मॉनसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है.
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के संकेतों के अनुसार, म्यांमार की ओर से एक कमजोर सर्कुलेशन 25 जून के बाद बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर सकता है लेकिन फिलहाल इसे किसी बड़े बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है.