मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने मंत्रिमंडल में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस ले लिया है. अब यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास रहेगा. इस फेरबदल के बाद अब यह पूरा महकमा सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधीन काम करेगा. विभाग छिनने के बाद मंत्री लखन पटेल के कद में भारी कटौती हुई है और वे अब मध्य प्रदेश शासन में केवल 'आनंद विभाग' के ही मंत्री रह गए हैं.
इस नए प्रशासनिक आदेश के लागू होने के साथ ही मुख्यमंत्री मोहन यादव मध्य प्रदेश के इतिहास के सबसे शक्तिशाली मुख्यमंत्रियों की सूची में आ गए हैं. उनके पास विभागों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है.
मुख्यमंत्री अब सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज साधन, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय मामलों के साथ-साथ पशुपालन एवं डेयरी विभाग संभालेंगे. इसके अलावा वे सभी विभाग भी मुख्यमंत्री के पास रहेंगे, जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं.
गोशालाओं का मामला बना वजह?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले के पीछे स्वावलंबी गोशालाओं के लिए जमीन आवंटन का विवाद प्रमुख कारण माना जा रहा है. राज्य सरकार प्रदेश में स्वावलंबी गोशालाओं का मॉडल लागू करना चाहती थी, लेकिन जिन संस्थाओं का चयन किया गया था, उनकी कार्यक्षमता और पात्रता को लेकर सरकार के भीतर ही सवाल उठ रहे थे.
सूत्र बताते हैं कि सरकार इन संस्थाओं के कामकाज से संतुष्ट नहीं थी. इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अधिकारियों और मंत्री की सहमति से उन्हें जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी चल रही थी.
बताया जा रहा है कि पिछले तीन-चार महीनों के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कई बार मंत्री लखन पटेल से चर्चा की और अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं.
संघ और केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंची शिकायत
सूत्रों के अनुसार, स्वावलंबी गोशालाओं के लिए जमीन आवंटन से जुड़ी शिकायतें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंची थीं. इसके बाद सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और अंततः पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री के अधीन करने का फैसला किया.