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शहीद की पत्नी को 26 साल बाद मिला न्याय, SC के आदेश पर मिला मुआवजा और पेंशन

शहीद मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को 26 साल के लंबे संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट ने न्याय दिलाया. सरकार ने बकाया पेंशन, मुआवजा और अतिरिक्त राशि जारी की. कोर्ट ने सरकार की गलती स्वीकार करते हुए परिवार को उचित लाभ देने का आदेश दिया.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहीद की पत्नी को 26 साल बाद न्याय मिला है. (फाइल फोटो-ITG)
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहीद की पत्नी को 26 साल बाद न्याय मिला है. (फाइल फोटो-ITG)

देश के लिए जान गंवाने वाले शहीद वीरों के परिवारों को कई बार अपने हक के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है. इसकी एक बानगी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले में देखने को मिली है. शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को 26 साल के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार न्याय मिल गया है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने शहीद के परिवार को बकाया पेंशन और मुआवजे की बड़ी रकम जारी कर दी है.

दरअसल, यह मामला भारत-चीन सीमा से जुड़ा है. 10 जुलाई 2000 को मोहन सिंह एक अहम सड़क निर्माण के दौरान काम कर रहे थे. उसी समय अचानक पहाड़ से मलबा गिरने लगा. मोहन सिंह ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने साथी मजदूरों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन वे खुद मलबे की चपेट में आ गए और शहीद हो गए.

उनकी इस अदम्य बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान को देखते हुए सरकार ने साल 2001 में उन्हें मरणोपरांत देश के तीसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया था.

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पेंशन के लिए क्यों करनी पड़ी 26 साल की लड़ाई?

शहीद होने के बाद उनकी पत्नी कुलदीप कौर ने असाधारण पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया था. लेकिन केंद्र सरकार ने तकनीकी नियमों का हवाला देकर उनकी मांग ठुकरा दी. सरकार का तर्क था कि उन्हें पहले ही वर्कमैन कॉम्पेंसेशन एक्ट के तहत मुआवजा मिल चुका है.

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इसके बाद विधवा पत्नी को न्याय के लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी. उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़े. आखिरकार मामला देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने बेहद गहरी संवेदनशीलता दिखाते हुए साफ शब्दों में कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले वीरों के परिवारों को अपने अधिकारों के लिए दशकों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़े.

 कोर्ट ने माना कि सरकार ने इस केस को गलत कैटेगरी में रखा था, जबकि शहीद के बलिदान को कैटेगरी सी के तहत विशेष लाभ मिलना चाहिए था.

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सुप्रीम कोर्ट की फटकार और हाई कोर्ट के पुराने आदेश के बाद अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि बकाया राशि दी जा चुकी है. कुल 14 लाख 28 हजार 200 की मुख्य राशि कुलदीप कौर के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है. इसके अलावा ₹4,12,064 असाधारण पेंशन के एरियर के रूप में दिए गए हैं,

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ₹10,00,000 की अतिरिक्त समेकित राशि देने का भी आदेश दिया है. अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि इंसाफ पाने में हुई देरी को इस मामले में राहत देने के आड़े नहीं आने दिया जाएगा.

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