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लाल चंद के जज्बे को सलाम! 85 की उम्र में किया MA... अब करेंगे PHD

हरियाणा के सिरसा के 85 वर्षीय पूर्व सैनिक लाल चंद गोदारा ने साबित कर दिया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. 76 साल की उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू करने के बाद उन्होंने 81 वर्ष की उम्र में ग्रेजुएशन पूरी की और अब IGNOU से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. सेना और हरियाणा परिवहन विभाग में सेवा दे चुके गोदारा अब PhD या लॉ की पढ़ाई करने की तैयारी में हैं.

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लाल चंद गोदरा, जिन्होंने 85 की उम्र में किया MA. (Photo: ITG)
लाल चंद गोदरा, जिन्होंने 85 की उम्र में किया MA. (Photo: ITG)

उम्र सिर्फ एक संख्या है और इसे सच कर दिखाया है हरियाणा के सिरसा के रहने वाले पूर्व सैनिक लाल चंद गोदारा ने. 85 साल की उम्र में उन्होंने इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. खास बात यह है कि पढ़ाई को लेकर उनका जुनून अभी थमा नहीं है. अब वह PhD या लॉ की पढ़ाई करने की तैयारी में हैं. 76 साल की उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू करने वाले गोदारा को अपने पोते-पोतियों के सवालों ने अधूरी पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रेरित किया था.

81 साल की उम्र में किया MA
एक एजेंसी के मुताबिक पांच साल बाद, 81 साल की उम्र में उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की. उनके बेटे डॉ. साहिब राम गोदारा के अनुसार अब उन्होंने अपनी MA भी पूरी कर ली है. साहिब राम ने रविवार को कहा, "मेरे पिता ने IGNOU से मास्टर्स इन आर्ट्स प्रोग्राम पूरा किया. इससे पहले, उन्होंने 2023 में अपनी ग्रेजुएशन भी पूरी की थी."

गोदारा ने कहा कि उनकी पढ़ाई उनके जीवन का एक अधूरा अध्याय बनकर रह गई थी क्योंकि हालात उन्हें दूसरी तरफ ले गए थे. वे 20 साल के होने से पहले ही सेना में शामिल हो गए थे और सेना में सेवा करने के बाद, उन्होंने हरियाणा परिवहन विभाग में यार्ड मास्टर के तौर पर काम किया. 2002 में नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने खेल में भी हिस्सा लिया और मास्टर्स एथलेटिक्स में मुकाबला किया, साथ ही हरियाणा मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं और अन्य इवेंट्स में मेडल भी जीते.

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उनके बड़े बेटे ने बताया कि गोदारा की किताबों में दिलचस्पी तब फिर से जगी जब उनके छोटे बेटे के दो बच्चों ने उनसे सवाल पूछना शुरू किया. साहिब राम ने कहा, "मेरे पिता को जवानी के दिनों से ही किताबों का बहुत शौक था. वे डायरी भी लिखते थे क्योंकि लिखने से उन्हें हमेशा बहुत संतुष्टि मिलती थी."

76 की उम्र में फिर से शुरू की पढ़ाई
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन ज़िंदगी के हालात उन्हें दूसरी तरफ ले गए और वे अपनी पढ़ाई उस तरह से जारी नहीं रख पाए जैसा वे चाहते थे. मेरे छोटे भाई के दो बच्चे उनसे सवाल पूछते थे, जिससे किताबें पढ़ने की उनकी इच्छा को बढ़ावा मिला और वह फिर से जाग गई, भले ही इसके लिए उन्हें 76 साल की उम्र में शुरुआत करनी पड़ी."

गोदारा ने कहा कि उनका सफर यह दिखाता है कि सीखने की इच्छा किसी भी उम्र में नहीं रुकनी चाहिए और शिक्षा इंसान का नज़रिया बढ़ाती है.

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