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महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी बैन हुआ एनालॉग पनीर!

महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक में भी एनालॉग पनीर के भंडारण, बिक्री और सप्लाई पर रोक लगा दी गई है. हालांकि फिलहाल सिर्फ एक साल के लिए यह रोक लगाई गई है.

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एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर

कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा और औषधीय प्रशासन ने 17 अगस्त 2026 से एक साल के लिए 'पनीर' के नाम पर बेचे जाने वाले एनालॉग/नॉन डेयरी पनीर के निर्माण, बिक्री, भंडारण, वितरण और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. 

अब मार्केट में सिर्फ स्टैंडर्ड दूध से बने पनीर को ही पनीर के तौर पर बेचा जा सकेगा. कर्नाटक में 17 अगस्त से ही एनालॉग पनीर पर रोक लग गई है. खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a), 18 और 29 के तहत यह आदेश जारी किया गया. 

क्या है एनालॉग पनीर

खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य एडिटिव्स) नियम, 2011 के नियम 2.1.16 के मुताबिक, पनीर दूध से बना एक स्टैंडर्ड खाद्य उत्पाद है. पनीर का एक मुख्य हिस्सा दूध का फैट है, लेकिन एनालॉग पनीर में दूध के फैट की जगह वेजिटेबल ऑयल, वेजिटेबल फैट या दूसरे नॉन-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. 

कर्नाटक ने पनीर के कई सैंपल लिए गए और इसकी जांच की गई. जांच में पाया गया कि इनमें कोई मिलावट नहीं है. भले ही पनीर में वेजिटेबल ऑयल, वेजिटेबल फैट या अन्य डेयरी सामग्री की मिलावट नहीं पाई गई है, फिर भी जनहित में एनालॉग पनीर पर रोक लगा दी गई है. ताकि इन उत्पादों का इस्तेमाल, भंडारण, सप्लाई, बिक्री या ट्रांसपोर्टेशन न किया जा सके. यह फैसला एक साल तक राज्य में लागू रहेगा. 

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यह रोक सिर्फ़ उन डेयरी एनालॉग उत्पादों पर लागू होती है जिनके लिए FSSAI ने कोई खास क्वालिटी स्टैंडर्ड तय नहीं किए हैं. यह आदेश फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे पहले से तय मानकों वाले खाद्य उत्पादों पर लागू नहीं होगा. क्योंकि इनके लिए पहले से ही अलग नियम और मानक हैं. साथ ही, इस आदेश के बाद कोई भी फूड ऑपरेटर नकली या नॉन डेयरी पनीर का इस्तेमाल, भंडारण, सप्लाई या बिक्री नहीं करेगा. 

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